कलम से
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Kalam se
सुनिए नए ज़माने की नयी कवितायेंकलम से एक व्हात्सप्प ग्रुप का संयोजन है जिसमें कई नामी गिरामी कवि और लेखक हैं, यह पॉडकास्ट उनके लेखन की प्रक्रिया और उनकी रचनाओं को आम जनों तक लाने का तुच्छ सा प्रयास है। आइये सुनतेहैं| अपनी प्रतिक्रियाओं से नवाजें। धन्यवाद।।और कवितायें पढ़ने के लिए हमारे फ़ेसबुक पेज पर जाएँ....https://www.facebook.com/rachnaayeaapkikalamse/#hindi #love #sad #shayari #quotes #poetry #india #urdu #follow #lovequotes #like #hindishayari #sadshayari #shayar #urdupoetry #shayarilover #loveshayari #urdushayari #shayri #hindipoetry #writersofinstagram #ishq #hindiquotes #shayaris #writer #instagram #bollywood #shayaries #bhfyp #bhfyp
कलम से - ऑनलाइन कवि सम्मेलन-   कृष्ण मोहन निगम  की कविता उन्ही की जुबानी
z### यज्ञ सरिस शुभ वृक्षारोपण ###हमें पता है तुम्हें पता है पता सभी को है इतना।यज्ञ सरिस शुभ वृक्षारोपण पाप बड़ा तरु-वन कटना।।अनावृष्टि अतिवृष्टि कभी तो कभी धरित्री का कंपन ।कितने दे संकेत प्रकृति औ कितना दिखलाए दर्पण ।।पर्यावरण सुरक्षा पर गंभीर नहीं यदि हम होंगे।अभिशाप प्रकृति का भोगेंगे हम रोग ग्रस्त अंधे- गूंगे ।।यह सुसभ्य उन्नत समाज यह और करेगा अति कितना।।1।।यज्ञ सरिस शुभ वृक्षारोपण ,पाप बड़ा तरु- वन कटना।।सुरभित सुखद पवन रह जाये ना केवल सपना बनकर ।हो जाएँ ना दुष्कर साँसें, भर जाए विष कण कण पर ।।सुख विलास वैभव यह कैसा यह कैसी है भौतिकता ।'सांसो की कीमत पर जीवन' यह कैसी है आधुनिकता।गिरि ,वन, सरि,सर,निर्झर, सागर सब विषाक्त होते जाते।रसा , रसातल ,अंबर,पशु, खग रोते,पर हम मदमाते ।।उत्पादकता लुप्त हो रही लुप्त हो रहा जल अपना ।।2।।यज्ञ सरिस शुभ वृक्षारोपण पाप बड़ा तरु-वन कटना ।।चलो करें संकल्प आज कुछ पर्यावरण बचाने को ।करके दिखलाएंगे, प्रेरित करेंगे वृक्ष लगाने को।प्रकृति की लय में जीवन जीने, का अभ्यास करेंगे हम ।बहुत हो चुकी लापरवाही अब कुछ खास करेंगे हम।रखेंगे निज परिवेश स्वच्छ शुचि जल भोजन लेंगे सात्विक।नहीं प्रकृति का ह्रास करेंगे,करेंगे जीवन परिमार्जित ।।पर्यावरण प्रदूषण का अब बहुत जरूरी है रुकना ।।3।।यज्ञ सरिस वृक्षारोपण पाप बड़ा तरु-वन कटना ।। कलम से कृष्ण मोहन निगम (सीतापुर)सरगुजासुनिए नए ज़माने की नयी कवितायेंकलम से एक व्हात्सप्प ग्रुप का संयोजन है जिसमें कई नामी गिरामी कवि और लेखक हैं, यह पॉडकास्ट उनके लेखन की प्रक्रिया और उनकी रचनाओं को आम जनों तक लाने का तुच्छ सा प्रयास है। आइये सुनतेहैं| अपनी प्रतिक्रियाओं से नवाजें। धन्यवाद।।और कवितायें पढ़ने के लिए हमारे फ़ेसबुक पेज पर जाएँ....https://www.facebook.com/rachnaayeaapkikalamse/
Apr 21, 2020
3 min
कलम से - ऑनलाइन कवि सम्मेलन-  मन्शा शुक्ला की कविता उन्ही की जुबानी
विधा गीतविषय गुनगुनी धूप🌹🌹🌹🌹🌹गुनगुनी धूप धीरे से कह गयीजागो उठो पहचानो अपने वजूद कोदेकर उमंग उजास मेरा दामनवो भर गयी।गुनगुनी धूप,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,।उलझनों मे गम की, उलझा हुआँ था मैसंकल्प भर हृदय में पथ मुझकोदिखा गयी।गुनगुनी धूप,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,।किरणें न ई ऊषा की पुकारतीअधीर हैजागों उठों मायूसियों के दामन को छोड़ के।हृदय में चेतना उमंग, जोशभर गयीगुनगुनी धूप,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,।अवसाद दर्द से, था आहत मेरा हृदयगैरों की क्या कहें, जख्म अपनो ने थे दिये।सहला मेरे जख्मों को मरहम लगा गयीगुनगुनी धूप धीरे से कह गयीगुनगुनी धूप,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,। मन्शा शुक्लाअम्बिकापुरसुनिए नए ज़माने की नयी कवितायेंकलम से एक व्हात्सप्प ग्रुप का संयोजन है जिसमें कई नामी गिरामी कवि और लेखक हैं, यह पॉडकास्ट उनके लेखन की प्रक्रिया और उनकी रचनाओं को आम जनों तक लाने का तुच्छ सा प्रयास है। आइये सुनतेहैं| अपनी प्रतिक्रियाओं से नवाजें। धन्यवाद।।और कवितायें पढ़ने के लिए हमारे फ़ेसबुक पेज पर जाएँ....https://www.facebook.com/rachnaayeaapkikalamse/
Apr 21, 2020
2 min
कलम से - ऑनलाइन कवि सम्मेलन- कमलेश्वर  की कविता उन्ही की जुबानी
दीप***दीप जलाओ अंतस मेंतम स्वयं दूर हो जायेज्ञान पुंज से आलोकितपथ सुगम लक्ष्य को पाये ।लक्ष्य कठिन जितना भी क्यूँ नाज्ञान दीप सुलझातामग के काँटों को चुन चुन करविजयी भाग्य बनाता ।कठिन दौर है जन जन मेंइक ज्ञान जागरण लायेंसंगत बातों को अपनााकरमानवता को बचायें ।भेद भाव को भूलकर सारेदया की दीप जलालेंत्रस्त मानवीय शरणागत कोउर से गले लगालें ।कमलेश्वरसुनिए नए ज़माने की नयी कवितायेंकलम से एक व्हात्सप्प ग्रुप का संयोजन है जिसमें कई नामी गिरामी कवि और लेखक हैं, यह पॉडकास्ट उनके लेखन की प्रक्रिया और उनकी रचनाओं को आम जनों तक लाने का तुच्छ सा प्रयास है। आइये सुनतेहैं| अपनी प्रतिक्रियाओं से नवाजें। धन्यवाद।।और कवितायें पढ़ने के लिए हमारे फ़ेसबुक पेज पर जाएँ....https://www.facebook.com/rachnaayeaapkikalamse/
Apr 21, 2020
5 min
कलम से - ऑनलाइन कवि सम्मेलन-  अर्चना पाठक  निरंतर की कविता उन्ही की जुबानी
गीत-------पहले पाती प्रेम की------------------------मौन ही करती रही,मौन से संवाद।दिल बहुत व्याकुल हुआ,और घिर गया अवसाद।बिन तुम्हारे रह न पाऊँ,कह रही मैं तुमसे आजचाँद भी अब मुँह चिढा़ये,आ रही है मुझको लाज। छेड़ कर झंकार तुम दे गये इक याद मौन ही करती रही मौन से संवाद। दिल बहुत.... हाथों में मिल गये हाथ और नैन हैं अभिराम । भीगती पलकें झुकी फिर नहीं विश्राम ।मूक भी वाचाल हैदिल हुआ आबाद। मौन ही करती रहीमौन से संवाद दिल बहुत.....विस्मृत पटल पे खींचतीउष्ण सी कलियाँ उदास।सो रही सुर गामिनीभर के ले श्वासों में श्वास।निश्छला हूँ मुझसे मिलयूँ न कर मुझको आजाद।मौन ही करती रहीमौन से संवाददिल बहुत... पलकों पे अश्रु टिके कुछ कुछ लुढ़कते ही रहे । भाल उर स्वर वेदना के रूद्ध क्रुद्ध क्रंदित हुए। झील चक्षु हैं ये खारे रिस रहे हैं बन मवाद। मौन ही करती रही दिल...अर्चना पाठक निरंतर अम्बिकापुरसुनिए नए ज़माने की नयी कवितायेंकलम से एक व्हात्सप्प ग्रुप का संयोजन है जिसमें कई नामी गिरामी कवि और लेखक हैं, यह पॉडकास्ट उनके लेखन की प्रक्रिया और उनकी रचनाओं को आम जनों तक लाने का तुच्छ सा प्रयास है। आइये सुनतेहैं| अपनी प्रतिक्रियाओं से नवाजें। धन्यवाद।।और कवितायें पढ़ने के लिए हमारे फ़ेसबुक पेज पर जाएँ....https://www.facebook.com/rachnaayeaapkikalamse/
Apr 21, 2020
4 min
कलम से - ऑनलाइन कवि सम्मेलन- डॉ.अवधेश तिवारी "भावुक"  की कविता उन्ही की जुबानी
दी और जलतुम हो कल-कल करती नदिया,मैं हूँ तुझमें बहता जल,तेरे मन के आश्रय से ही , उन्नत होगा मेरा कल।तुम हो चञ्चल बहती धारा, मैं बसता हूँ तेरे अन्तर,लहरा के बल खाके बहना मुझको लिए हृदय के अन्दर।साथ चले हैं सतत चिरन्तन, मिले रुकावट या अरिदल,तुम हो कल-कल करती नदिया,मैं हूँ तुझमें बहता जल।डगर तेरी पर्वत घाटी है पर संग - संग मैं भी चलता हूँ,ऊबड़ - खाबड़ सब रास्तों पर चोट सभी संग - संग सहता हूँ।जब तक है अस्तित्व हमारा , साथ रहेंगे हम प्रतिपल,तुम हो कल-कल करती नदिया , मैं हूँ तुझमें बहता जल।न तुम अपना पथ छोड़ोगी न ही मेरा संग छूटेगा,शाश्वत प्रेम हमारा हमदम कभी न ये बन्धन टूटेगा।पाकर प्रिये ! तरंगिनि का संग , मैं भी हो जाता हूँ निर्मल,तुम हो कल - कल करती नदिया , मैं हूँ तुझमें बहता जल।जलधि मेरा ही बृहद रूप है जिससे तुम मिलने को आतुर,ज्यों बारिश के लिए तड़पता हिय में प्यास लिये दादुर।वर्षों की चाहत पूरी हो , खिल जाएगा अन्तस्तल,तुम हो कल - कल करती नदिया , मैं हूँ तुझमें बहता जल।तुम मेरी चिर - संगिनि तटिनी "भावुक" तेरा प्रिय समन्दर,लहर - लहर लहरा के आना मेरे अन्तर्मन के अन्दर।सदियों से कर रहे प्रतीक्षा,कर दो शान्त हृदय की हलचल,तुम हो कल - कल करती नदिया , मैं हूँ तुझमें बहता जल।तेरे मन के आश्रय से ही , उन्नत होगा मेरा कल...डॉ.अवधेश तिवारी "भावुक"सुनिए नए ज़माने की नयी कवितायेंकलम से एक व्हात्सप्प ग्रुप का संयोजन है जिसमें कई नामी गिरामी कवि और लेखक हैं, यह पॉडकास्ट उनके लेखन की प्रक्रिया और उनकी रचनाओं को आम जनों तक लाने का तुच्छ सा प्रयास है। आइये सुनतेहैं| अपनी प्रतिक्रियाओं से नवाजें। धन्यवाद।।और कवितायें पढ़ने के लिए हमारे फ़ेसबुक पेज पर जाएँ....https://www.facebook.com/rachnaayeaapkikalamse/
Apr 19, 2020
3 min
कलम से - ऑनलाइन कवि सम्मेलन-  मधु मन मौजी की कविता उन्ही की जुबानी
सन्नाटे नहीं होंगे हावीताल गीत झनकार के ये वादा हिन्दुस्तान सेहै वादा सारे जहान से कामयाब नहीं होने देंगे दुष्ट चीनी साजिशों को संयम सेवा दवा दुआ से खतम करें विषाणु कोमानवता को करें सुरक्षित कोशिश हर पुरजोर सेयेवादा----------जप तप व्रत उपवास हमारे शस्त्र रहें दुष्कालों केशक्ति का आव्हान करेंगेंरोग हरें सब कलयुग के ।विश्व गुरु भारत सदियों सेआन बान संग शान सेये वादा -------शत्रु सुन्दर सृष्टि के येभूख मिटाते जीवों सेहिंसा करके नाचें गायेंनित ही खेलें प्रकृति सेविपरीत बुद्धि हो जाती है पल जो आयें विनाश के ये कहते -------- ये कहते -------मधु मन मौजीमौलिक प्रस्तुति ।सुनिए नए ज़माने की नयी कवितायेंकलम से एक व्हात्सप्प ग्रुप का संयोजन है जिसमें कई नामी गिरामी कवि और लेखक हैं, यह पॉडकास्ट उनके लेखन की प्रक्रिया और उनकी रचनाओं को आम जनों तक लाने का तुच्छ सा प्रयास है। आइये सुनतेहैं| अपनी प्रतिक्रियाओं से नवाजें। धन्यवाद।।और कवितायें पढ़ने के लिए हमारे फ़ेसबुक पेज पर जाएँ....https://www.facebook.com/rachnaayeaapkikalamse/
Apr 19, 2020
2 min
कलम से - ऑनलाइन कवि सम्मेलन- पूनम दुबे की कविता उन्ही की जुबानी
दिन शुक्रवारक्या चलोगे साथ मेरे/ उस गगन के पार।क्या चलोगे साथ मेरे, उस गगन के पार.....सपने कुछ तेरे मेरे, झील के उस पार....छोड़ दो सारी बलाएये,हमने माँगी है दुवायेरात की खामोशियाँ हैबह रही ठंडी हवाये,कैसा प्यारा पल ...ओ मेरे प्रियवर.....आ चले हम साथ ..... उस गगन के पार....रात काली है सुहानी,होंठ पर गुमसुम कहानी,चाँद की अठखेलियाँ है,दूर हुई तन्हाइयाँ है,रात ढ्ल रही है,बात कर रही है,हो न जाए भोर, मन मेरा विभोर, साथ तेरा पा गई मैं,मिल गया आसार.......क्या चलोगे साथ मेरे,उस गगन के पार........स्वरचित पूनम दुबे अम्बिकापुर छत्तीसगढ़सुनिए नए ज़माने की नयी कवितायेंकलम से एक व्हात्सप्प ग्रुप का संयोजन है जिसमें कई नामी गिरामी कवि और लेखक हैं, यह पॉडकास्ट उनके लेखन की प्रक्रिया और उनकी रचनाओं को आम जनों तक लाने का तुच्छ सा प्रयास है। आइये सुनतेहैं| अपनी प्रतिक्रियाओं से नवाजें। धन्यवाद।।और कवितायें पढ़ने के लिए हमारे फ़ेसबुक पेज पर जाएँ....https://www.facebook.com/rachnaayeaapkikalamse/
Apr 19, 2020
6 min
कलम से - ऑनलाइन कवि सम्मेलन- इन्द्रसेन अग्रवाल की कविता उन्ही की जुबानी
***अधिकार***कर्त्तव्य को भुला दियाअधिकार मांगते रहेपवित्रता को भूलकरविकार मांगते रहे।अगर न छोड़ राज्य सुखवन को न जाते राम तोअधिकार मिलता राज्य कान कर्त्तव्य निभाते राम तो।अधिकार तो मिलता उन्हेंकर्त्तव्य निभाते नहींराम वन न जाते तोवे राम बन पाते नहीं।जन जन के मन में बस गएराम जिस व्यवहार सेक्या मिला कैकेई कोजो मांगा था अधिकार से। राम को सुयश मिलावन जाकर मन में बस गएराम जैसे पुत्र कोसारे पिता तरस गए।कर्त्तव्य पर चलें अगरअधिकार मिल ही जाएंगेधरा का राज्य तुच्छ हैत्रैलोक्य राज्य पाएंगे।कर्त्तव्य निभाने को हीमिलते सदा अधिकार हैंपर भूलकर कर्त्तव्य कोसब मांगते अधिकार हैं।सोचो अयोध्या छोड़करयदि राम वन जाते नहींराजा तो बन जाते परवो राम बन पाते नहीं।सुग्रीव से तुलना करें तोबाली बली था कई गुनापर बाली को छोड़ राम नेपीड़ित सुग्रीव को चुना।जो जीतता सबका हृदयवह जीतता संग्राम हैक्रूरता रावण है तोदयालुता श्री राम है।भीलनी शबरी के बेरअनुज संग खाते नहींराजा तो बन जाते परवो राम बन पाते नहीं।राजा बनना सहज हैपर राम का पथ है दुरुह राम बन पाता वहीवशिष्ठ सा हो जिसका गुरु।त्याग की शिक्षा जिन्हेंबचपन से दी जाती रहीसंस्कार उनको थे मिलेमातृ पितृ भक्ति के।माता-पिता और गुरु कोप्रात: उठ करते प्रणामजिनका आदर्श चरित्र होवही बन पाते हैं श्री राम।राम सहकर कष्ट भीपिता का वचन निभाते नहींराजा तो बन जाते परवो राम बन पाते नहीं।पिता का वचन निभाने कोयदि राम वन जाते नहींराजा तो बन जाते परवो राम बन पाते नहीं। स्वरचित इन्द्रसेनअग्रवाल बिलासपुर (छ०ग०)सुनिए नए ज़माने की नयी कवितायेंकलम से एक व्हात्सप्प ग्रुप का संयोजन है जिसमें कई नामी गिरामी कवि और लेखक हैं, यह पॉडकास्ट उनके लेखन की प्रक्रिया और उनकी रचनाओं को आम जनों तक लाने का तुच्छ सा प्रयास है। आइये सुनतेहैं| अपनी प्रतिक्रियाओं से नवाजें। धन्यवाद।।और कवितायें पढ़ने के लिए हमारे फ़ेसबुक पेज पर जाएँ....https://www.facebook.com/rachnaayeaapkikalamse/
Apr 19, 2020
5 min
कलम से - ऑनलाइन कवि सम्मेलन- मधु गुप्ता "महक" की कविता उन्ही की जुबानी
गीत कृपा करो भगवानभंवर में डूब रही है नैया,न पतवार है, न कोई खेवैया,सभी का करो कल्याण प्रभुजी,कृपा करो भगवान।कृपा................पीपल पात सम मन काँप रहा है,क्या होगा बेबस मन सोंच रहा हैदेदो दया का दान प्रभु जीकृपा करो भगवानकृपा......................आस का दीप मन में जला दो,तिमिर विपदा सारा दूर हटा दो,गाऊं तेरा गुणगान प्रभु जी,कृपा करो भगवान।कृपा....................तेरी भक्ति महक दास न जाने,दिल से तेरी महिमा को माने,जग का करो कलयाण प्रभु जी,कृपा करो भगवान।कृपा..............मधु गुप्ता "महक"सुनिए नए ज़माने की नयी कवितायेंकलम से एक व्हात्सप्प ग्रुप का संयोजन है जिसमें कई नामी गिरामी कवि और लेखक हैं, यह पॉडकास्ट उनके लेखन की प्रक्रिया और उनकी रचनाओं को आम जनों तक लाने का तुच्छ सा प्रयास है। आइये सुनतेहैं| अपनी प्रतिक्रियाओं से नवाजें। धन्यवाद।।और कवितायें पढ़ने के लिए हमारे फ़ेसबुक पेज पर जाएँ....https://www.facebook.com/rachnaayeaapkikalamse/
Apr 19, 2020
2 min
कलम से - ऑनलाइन कवि सम्मेलन- कृष्ण मोहन निगम की कविता उन्ही की जुबानी
बेटियाँ********हर पिता के हेतु हैं, प्रशस्ति पत्र बेटियाँ।स्वार्थ हीन नेहयुत पवित्र मित्र बेटियाँ ।। बुहारती,सँवारती हैं ,जो पिता के गेह को।तौलती नहीं कभी, किसी से अपने नेह को ।।चांदनी सी शुभ्र और सौम्य प्यारी बेटियां ।हर पिता के हेतु हैं प्रशस्ति -पत्र बेटियाँ।।जग का सारा क्लेश-कष्ट पल में दूर कर दें जो ।अवसाद- ग्रस्त-त्रस्त मन में शांति खूब भर दे जो ।।करती हैं कमाल जिनकी जादू वाली उँगलियाँ ।हर पिता के हेतु हैं प्रशस्ति -पत्र बेटियाँ ।।हों रसोई में बने पकवान छप्पन ही भले । और सारे ही न हो क्यों सुधा मक्खन में तले।।किंतु सबसे मीठी लगती बेटियों की रोटियाँ।हर पिता के हेतु हैं प्रशस्ति पत्र बेटियां ।। ✍️ कृष्ण मोहन निगम (सीतापुर)सुनिए नए ज़माने की नयी कवितायेंकलम से एक व्हात्सप्प ग्रुप का संयोजन है जिसमें कई नामी गिरामी कवि और लेखक हैं, यह पॉडकास्ट उनके लेखन की प्रक्रिया और उनकी रचनाओं को आम जनों तक लाने का तुच्छ सा प्रयास है। आइये सुनतेहैं| अपनी प्रतिक्रियाओं से नवाजें। धन्यवाद।।और कवितायें पढ़ने के लिए हमारे फ़ेसबुक पेज पर जाएँ....https://www.facebook.com/rachnaayeaapkikalamse/
Apr 19, 2020
2 min
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