कलम से
कलम से
Kalam se
कलम से - ऑनलाइन कवि सम्मेलन- कृष्ण मोहन निगम की कविता उन्ही की जुबानी
2 minutes Posted Apr 19, 2020 at 3:38 pm.
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बेटियाँ
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हर पिता के हेतु हैं, प्रशस्ति पत्र बेटियाँ।
स्वार्थ हीन नेहयुत पवित्र मित्र बेटियाँ ।।

बुहारती,सँवारती हैं ,जो पिता के गेह को।
तौलती नहीं कभी, किसी से अपने नेह को ।।

चांदनी सी शुभ्र और सौम्य प्यारी बेटियां ।
हर पिता के हेतु हैं प्रशस्ति -पत्र बेटियाँ।।

जग का सारा क्लेश-कष्ट पल में दूर कर दें जो ।
अवसाद- ग्रस्त-त्रस्त मन में शांति खूब भर दे जो ।।

करती हैं कमाल जिनकी जादू वाली उँगलियाँ ।
हर पिता के हेतु हैं प्रशस्ति -पत्र बेटियाँ ।।

हों रसोई में बने पकवान छप्पन ही भले ।
और सारे ही न हो क्यों सुधा मक्खन में तले।।

किंतु सबसे मीठी लगती बेटियों की रोटियाँ।
हर पिता के हेतु हैं प्रशस्ति पत्र बेटियां ।।

✍️ कृष्ण मोहन निगम
(सीतापुर)

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