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दीप
***
दीप जलाओ अंतस में
तम स्वयं दूर हो जाये
ज्ञान पुंज से आलोकित
पथ सुगम लक्ष्य को पाये ।
लक्ष्य कठिन जितना भी क्यूँ ना
ज्ञान दीप सुलझाता
मग के काँटों को चुन चुन कर
विजयी भाग्य बनाता ।
कठिन दौर है जन जन में
इक ज्ञान जागरण लायें
संगत बातों को अपनााकर
मानवता को बचायें ।
भेद भाव को भूलकर सारे
दया की दीप जलालें
त्रस्त मानवीय शरणागत को
उर से गले लगालें ।
कमलेश्वर
सुनिए नए ज़माने की नयी कवितायें
कलम से एक व्हात्सप्प ग्रुप का संयोजन है जिसमें कई नामी गिरामी कवि और लेखक हैं, यह पॉडकास्ट उनके लेखन की प्रक्रिया और उनकी रचनाओं को आम जनों तक लाने का तुच्छ सा प्रयास है। आइये सुनते
हैं| अपनी प्रतिक्रियाओं से नवाजें। धन्यवाद।।
और कवितायें पढ़ने के लिए हमारे फ़ेसबुक पेज पर जाएँ....
https://www.facebook.com/rachnaayeaapkikalamse/
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दीप जलाओ अंतस में
तम स्वयं दूर हो जाये
ज्ञान पुंज से आलोकित
पथ सुगम लक्ष्य को पाये ।
लक्ष्य कठिन जितना भी क्यूँ ना
ज्ञान दीप सुलझाता
मग के काँटों को चुन चुन कर
विजयी भाग्य बनाता ।
कठिन दौर है जन जन में
इक ज्ञान जागरण लायें
संगत बातों को अपनााकर
मानवता को बचायें ।
भेद भाव को भूलकर सारे
दया की दीप जलालें
त्रस्त मानवीय शरणागत को
उर से गले लगालें ।
कमलेश्वर
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