कलम से
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Kalam se
कलम से - ऑनलाइन कवि सम्मेलन- मधु गुप्ता "महक" की कविता उन्ही की जुबानी
2 minutes Posted Apr 19, 2020 at 3:40 pm.
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गीत

कृपा करो भगवान

भंवर में डूब रही है नैया,
न पतवार है, न कोई खेवैया,
सभी का करो कल्याण प्रभुजी,
कृपा करो भगवान।
कृपा................

पीपल पात सम मन काँप रहा है,
क्या होगा बेबस मन सोंच रहा है
देदो दया का दान प्रभु जी
कृपा करो भगवान
कृपा......................

आस का दीप मन में जला दो,
तिमिर विपदा सारा दूर हटा दो,
गाऊं तेरा गुणगान प्रभु जी,
कृपा करो भगवान।
कृपा....................

तेरी भक्ति महक दास न जाने,
दिल से तेरी महिमा को माने,
जग का करो कलयाण प्रभु जी,
कृपा करो भगवान।
कृपा..............

मधु गुप्ता "महक"


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