
#ग़ज़लغزل: ४२५
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1222-1222-1222-1222
दोस्तो, गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ। आज के दिन पेश है मेरी 425 वीं ग़ज़ल, इसके साथ ही आपलोगों के आशीर्वाद से पाँचवें शतक का एक क्वार्टर पूरा। 😁💞🙏. तो लीजिए, मुलाहिज़ा फ़रमाएँ, अर्ज़ किया है-
रविश बदली है जीने की, हक़-ए-मदफ़न नहीं बदला
कि गुल आये गये कितने, कभी गुलशन नहीं बदला //१
ज़मीं बदली, फ़लक बदला, कि बदला चाँद भी लेकिन
हमारे गाँव की मिट्टी का सोंधापन नहीं बदला //२
वहाँ तुलसी है अम्मा की लगी ये सोचकर हमने
मकाँ की साख़्त तो बदली मगर आँगन नहीं बदला //३
बहुत जम कर निभाते हैं किसी से भी अदावत हम
कि हमने दोस्त तो बदले मगर दुश्मन नहीं बदला //४
करोड़ों ख़र्च करती आई हैं सरकारें मुफ़लिस पे
अमीरे मुल्क तो बदले मगर निर्धन नहीं बदला //५
वही भाला, वही तेवर, वही है ताव मूँछों पे
कि मूरत में भी राणा का कभी जोबन नहीं बदला //६
हमारे इज़्दिवाजी प्यार की खिचड़ी पकी यूँ 'राज़'
कि हमने आँच तो बदली मगर ईंधन नहीं बदला //७
#राज़_नवादवी®
(एक अंजान शाइर)
💞░R░a░z░ ░N░a░w░a░d░w░i░💞
#راز_نوادوی
(ایک انجان شاعر)
रविश- अंदाज़, मिज़ाज
हक़- सच्चाई
मदफ़न- मुर्दे के दफ्न होने की जगह, क़ब्र, समाधि-भवन
फ़लक- आसमान
साख़्त- संरचना, बनावट
अदावत- दुश्मनी
मुफ़लिस- ग़रीब
जोबन- जवानी
इज़्दिवाजी- वैवाहिक
Jan 31, 2021
2 min

#ग़ज़लغزل: ४३०
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2122-1122-1122-22
यूँ तो कहते हैं वो ईमान नहीं छोड़ेंगे
मुफ़्त मिल जाए तो बनियान नहीं छोड़ेंगे //१
इश्क़ के नीले समंदर की तरफ़ मत निकलो
तुमको जज़्बात के तूफ़ान नहीं छोड़ेंगे //२
छोड़ कर कपड़ा बदन का भी वो तो भाग गये
जो कभी कहते थे मैदान नहीं छोड़ेंगे //३
बद्दुआ है मेरी ग़लती से गये जन्नत तो
तुमको फ़िरदौस के निगरान नहीं छोड़ेंगे //४
नीचे छोड़ेगी नहीं तुमको गुनाहों की सदा
और ऊपर तुम्हें भगवान नहीं छोड़ेंगे //५
प्यार करना हमें लैला की तरह सोच के ये
हम हैं मजनूँ, हमें इंसान नहीं छोड़ेंगे //६
आप छोड़ेंगे न ज़िद हमसे जुदा रहने की
और हम आपका अरमान नहीं छोड़ेंगे //७
तुझसे कुछ इतनी मुहब्बत है हमें ऐ 'ग़ालिब'
लह्द में भी तेरा दीवान नहीं छोड़ेंगे //८
ग़म न कर 'राज़' दियों में जो तेरे माया नहीं
घर फ़रिश्ते तेरा वीरान नहीं छोड़ेंगे //९
#राज़_नवादक़वी®
(एक अंजान शाइर)
💞░R░a░z░ ░N░a░w░a░d░w░i░💞
#راز_نوادوی
(ایک انجان شاعر)
निगरान- निगरानी करने वासके लोग
फ़िरदौस- जन्नत, स्वर्ग
असद- मिर्ज़ा ग़ालिब
लह्द- क़ब्र
माया- माल, तेल
Jan 31, 2021
9 min

पिछले पोस्ट में हमने ये जाना कि ग़ज़ल में शब्द और रुक्न के बीच क्या अंतर है। साथ ही ये भी कि ग़ज़ल या शेर की लय की ईकाई रुक्न है, शब्द नहीं। इस अध्याय में हम ये जानने की कोशिश करेंगे के एक शेर की बनावट में क्या क्या अंतर्निहित है। यह रदीफ़ और क़ाफ़िया से पृथक बात है।
किसी शेर को हम एक डबल स्टोरी बिल्डिंग कह सकते हैं जिसके प्रथम तल को सानी मिसरा (नीचे वाला मिसरा) और द्वितीय तल को ऊला मिसरा (ऊपर वाला मिसरा) कहते हैं। अब अगर शेर एक घर है तो यह ईंटों से बना है जिसे रुक्न कह सकते हैं और प्रत्येक ईंट मिट्टी से बनी है जिसे हम शब्द, ध्वनि या अक्षर कह सकते हैं।
चूँकि शेर एक घर है तो इसमें कमरे भी होंगे जैसे बेडरूम, किचन, हॉल, बाथरूम, इत्यादि। आइए हम ये जानने की कोशिश करते हैं कि शेर रूपी घर के अंदर बने कमरों को क्या कहते हैं।
ग़ज़ल की भाषा में इन्हें जुज़ यानी टुकड़ा, या शेर का टुकड़ा बोलते हैं और बहुवचन में अज्ज़ा, या अज्ज़ा ए रुक्न यानी रुक्न रूपी टुकड़े बोलते हैं।
अब हम ये फ़र्ज़ करते हैं कि शेर के प्रत्येक तल में तीन कमरे होते हैं, या यूँ कहें कि प्रत्येक मिसरे के तीन टुकड़े या अज्ज़ा ए रुक्न हैं, 1.आरंभ का रुक्न या जुज़, 2.मध्य का/के रुक्न या जुज़, और 3.अंत/उत्कर्ष का रुक्न या जुज़। प्रत्येक का अलग अलग नाम है। इसे नीचे दिए गए इलस्ट्रेशन से समझने की कोशिश करते हैं- #राज़ नवादवी
Oct 25, 2020
2 min

ग़ज़लों की लय को पकड़ने और सीखने के लिए रुक्न का ज्ञान सबसे ज़रूरी है!
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कोई भी ग़ज़ल शेर से बनी होती है, शेर शब्दों में निहित यानी समाये हुए ध्वनि-खण्डों के संयोजन से बनता है, जिन ध्वनि खण्डों को रुक्न भी कहते हैं. रुक्न और शब्द में फ़र्क ये है कि शब्द मूल रूप में हमेशा एक अकेला शब्द होता है, जैसे खाना, पीना, कपड़ा, नाम, घर, इत्यादि, जबकि रुक्न एक अकेला शब्द भी हो सकता है या कई शब्दों का योग भी. जैसे ‘दास्ताँ’ एक अकेला शब्द है, और एक रुक्न भी जिसका वज़न २१२ है और जिसका नाम फ़ा-इ-लुन है. इस उदहारण में शब्द और रुक्न दोनों एक शब्दीय हैं. मगर ‘आपका’ भी एक रुक्न है जिसका वज़न भी २१२ है और इस कारण इसका नाम भी फ़ा-इ-लुन है मगर ये दो शब्दों ‘आप’ और ‘का’ से मिलकर बना है. हालांकि बाद में हम देखेंगे कि कुछ रुक्न आवश्यक रूप से एक से अधिक शब्दों के संयोजन से ही बन सकते हैं, सिर्फ़ एक शब्द से नहीं. ये वही बात हुई कि स्तनधारी प्राणी दो पाँव वाले भी हो सकते हैं और चार पाँव वाले भी, मगर पंछी सिर्फ और सिर्फ़ दो पाँव वाले ही होते हैं!
Oct 24, 2020
1 min
