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#ग़ज़लغزل: ४३०------------------------2122-1122-1122-22यूँ तो कहते हैं वो ईमान नहीं छोड़ेंगेमुफ़्त मिल जाए तो बनियान नहीं छोड़ेंगे //१इश्क़ के नीले समंदर की तरफ़ मत निकलोतुमको जज़्बात के तूफ़ान नहीं छोड़ेंगे //२छोड़ कर कपड़ा बदन का भी वो तो भाग गयेजो कभी कहते थे मैदान नहीं छोड़ेंगे //३बद्दुआ है मेरी ग़लती से गये जन्नत तोतुमको फ़िरदौस के निगरान नहीं छोड़ेंगे //४नीचे छोड़ेगी नहीं तुमको गुनाहों की सदाऔर ऊपर तुम्हें भगवान नहीं छोड़ेंगे //५प्यार करना हमें लैला की तरह सोच के येहम हैं मजनूँ, हमें इंसान नहीं छोड़ेंगे //६आप छोड़ेंगे न ज़िद हमसे जुदा रहने कीऔर हम आपका अरमान नहीं छोड़ेंगे //७तुझसे कुछ इतनी मुहब्बत है हमें ऐ 'ग़ालिब'लह्द में भी तेरा दीवान नहीं छोड़ेंगे //८ग़म न कर 'राज़' दियों में जो तेरे माया नहींघर फ़रिश्ते तेरा वीरान नहीं छोड़ेंगे //९#राज़_नवादक़वी® (एक अंजान शाइर)💞░R░a░z░ ░N░a░w░a░d░w░i░💞#راز_نوادوی(ایک انجان شاعر)निगरान- निगरानी करने वासके लोगफ़िरदौस- जन्नत, स्वर्गअसद- मिर्ज़ा ग़ालिबलह्द- क़ब्रमाया- माल, तेल



