ग़ज़ल-गुरु
ग़ज़ल-गुरु
Raz Nawadwi
राज़ की आवाज़- यूँ तो कहते हैं वो ईमान नहीं छोड़ेंगे मुफ़्त मिल जाए तो बनियान नहीं छोड़ेंगे
9 minutes Posted Jan 31, 2021 at 2:51 pm.
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#ग़ज़लغزل: ४३०
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2122-1122-1122-22
यूँ तो कहते हैं वो ईमान नहीं छोड़ेंगे
मुफ़्त मिल जाए तो बनियान नहीं छोड़ेंगे //१
इश्क़ के नीले समंदर की तरफ़ मत निकलो
तुमको जज़्बात के तूफ़ान नहीं छोड़ेंगे //२
छोड़ कर कपड़ा बदन का भी वो तो भाग गये
जो कभी कहते थे मैदान नहीं छोड़ेंगे //३
बद्दुआ है मेरी ग़लती से गये जन्नत तो
तुमको फ़िरदौस के निगरान नहीं छोड़ेंगे //४
नीचे छोड़ेगी नहीं तुमको गुनाहों की सदा
और ऊपर तुम्हें भगवान नहीं छोड़ेंगे //५
प्यार करना हमें लैला की तरह सोच के ये
हम हैं मजनूँ, हमें इंसान नहीं छोड़ेंगे //६
आप छोड़ेंगे न ज़िद हमसे जुदा रहने की
और हम आपका अरमान नहीं छोड़ेंगे //७
तुझसे कुछ इतनी मुहब्बत है हमें ऐ 'ग़ालिब'
लह्द में भी तेरा दीवान नहीं छोड़ेंगे //८
ग़म न कर 'राज़' दियों में जो तेरे माया नहीं
घर फ़रिश्ते तेरा वीरान नहीं छोड़ेंगे //९
#राज़_नवादक़वी®
(एक अंजान शाइर)
💞░R░a░z░ ░N░a░w░a░d░w░i░💞
#راز_نوادوی
(ایک انجان شاعر)
निगरान- निगरानी करने वासके लोग
फ़िरदौस- जन्नत, स्वर्ग
असद- मिर्ज़ा ग़ालिब
लह्द- क़ब्र
माया- माल, तेल