ग़ज़ल-गुरु
ग़ज़ल-गुरु
Raz Nawadwi
शेर की बनावट
2 minutes Posted Oct 25, 2020 at 6:42 am.
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पिछले पोस्ट में हमने ये जाना कि ग़ज़ल में शब्द और रुक्न के बीच क्या अंतर है। साथ ही ये भी कि ग़ज़ल या शेर की लय की ईकाई रुक्न है, शब्द नहीं। इस अध्याय में हम ये जानने की कोशिश करेंगे के एक शेर की बनावट में क्या क्या अंतर्निहित है। यह रदीफ़ और क़ाफ़िया से पृथक बात है।
किसी शेर को हम एक डबल स्टोरी बिल्डिंग कह सकते हैं जिसके प्रथम तल को सानी मिसरा (नीचे वाला मिसरा) और द्वितीय तल को ऊला मिसरा (ऊपर वाला मिसरा) कहते हैं। अब अगर शेर एक घर है तो यह ईंटों से बना है जिसे रुक्न कह सकते हैं और प्रत्येक ईंट मिट्टी से बनी है जिसे हम शब्द, ध्वनि या अक्षर कह सकते हैं।
चूँकि शेर एक घर है तो इसमें कमरे भी होंगे जैसे बेडरूम, किचन, हॉल, बाथरूम, इत्यादि। आइए हम ये जानने की कोशिश करते हैं कि शेर रूपी घर के अंदर बने कमरों को क्या कहते हैं।
ग़ज़ल की भाषा में इन्हें जुज़ यानी टुकड़ा, या शेर का टुकड़ा बोलते हैं और बहुवचन में अज्ज़ा, या अज्ज़ा ए रुक्न यानी रुक्न रूपी टुकड़े बोलते हैं।
अब हम ये फ़र्ज़ करते हैं कि शेर के प्रत्येक तल में तीन कमरे होते हैं, या यूँ कहें कि प्रत्येक मिसरे के तीन टुकड़े या अज्ज़ा ए रुक्न हैं, 1.आरंभ का रुक्न या जुज़, 2.मध्य का/के रुक्न या जुज़, और 3.अंत/उत्कर्ष का रुक्न या जुज़। प्रत्येक का अलग अलग नाम है। इसे नीचे दिए गए इलस्ट्रेशन से समझने की कोशिश करते हैं- #राज़ नवादवी