ग़ज़ल-गुरु
ग़ज़ल-गुरु
Raz Nawadwi
ग़ज़लों की लय को पकड़ने और सीखने के लिए रुक्न का ज्ञान ज़रूरी है।
1 minutes Posted Oct 24, 2020 at 5:54 pm.
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ग़ज़लों की लय को पकड़ने और सीखने के लिए रुक्न का ज्ञान सबसे ज़रूरी है!
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कोई भी ग़ज़ल शेर से बनी होती है, शेर शब्दों में निहित यानी समाये हुए ध्वनि-खण्डों के संयोजन से बनता है, जिन ध्वनि खण्डों को रुक्न भी कहते हैं. रुक्न और शब्द में फ़र्क ये है कि शब्द मूल रूप में हमेशा एक अकेला शब्द होता है, जैसे खाना, पीना, कपड़ा, नाम, घर, इत्यादि, जबकि रुक्न एक अकेला शब्द भी हो सकता है या कई शब्दों का योग भी. जैसे ‘दास्ताँ’ एक अकेला शब्द है, और एक रुक्न भी जिसका वज़न २१२ है और जिसका नाम फ़ा-इ-लुन है. इस उदहारण में शब्द और रुक्न दोनों एक शब्दीय हैं. मगर ‘आपका’ भी एक रुक्न है जिसका वज़न भी २१२ है और इस कारण इसका नाम भी फ़ा-इ-लुन है मगर ये दो शब्दों ‘आप’ और ‘का’ से मिलकर बना है. हालांकि बाद में हम देखेंगे कि कुछ रुक्न आवश्यक रूप से एक से अधिक शब्दों के संयोजन से ही बन सकते हैं, सिर्फ़ एक शब्द से नहीं. ये वही बात हुई कि स्तनधारी प्राणी दो पाँव वाले भी हो सकते हैं और चार पाँव वाले भी, मगर पंछी सिर्फ और सिर्फ़ दो पाँव वाले ही होते हैं!