परमेश्वर की धार्मिकता जो रोमियों में प्रगट हुई - हमारा प्रभु जो परमेश्वर की धार्मिकता बना (II)
परमेश्वर की धार्मिकता जो रोमियों में प्रगट हुई - हमारा प्रभु जो परमेश्वर की धार्मिकता बना (II)
The New Life Mission
परमेश्वर की धार्मिकता पारदर्शक है और वह मनुष्यों की धार्मिकता से अलग है। परमेश्वर की धार्मिकता पानी और आत्मा के सुसमाचार में प्रगट हुई है, जो यूहन्ना के द्वारा यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर उसके लहू के द्वारा परिपूर्ण हुई है। ज्यादा देर हो जाए उससे पहले हमें परमेश्वर की धार्मिकता पर विश्वास की ओर वापस मुड़ना चाहिए। क्या आप जानते है की क्यों यीशु को यूहना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेना पडा? यदि यूहन्ना ने यीशु को बपतिस्मा नहीं दिया होता, तो हमारे पाप उसके ऊपर नहीं डाले जाते। यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला सबसे महान व्यक्ति था, और उसने यीशु को बपतिस्मा दिया था वह परमेश्वर के लिए जरुरी था की जिससे वह हमारे पापों को हमसे दूर करके यीशु पर डाल सके। यह सारी चीजो ने नया जन्म पाने के बारे में मेरी भूतकाल की समझ को बदल दिया, जब में केवल क्रूस के लहू को जानता था। परमेश्वर ने अब आपको सिखाया है की उसकी धार्मिकता क्या है जिससे हम पूरी रीति से उसकी धार्मिकता को जान सके और विश्वास कर सके। मैं इस सारे आशीषो के लिए परमेश्वर का आभारी हूँ।
Ch7-3. हम प्रभु की स्तुति क्यों कर सकते है उसका कारण (रोमियों ७:५-१३)
मैं उस प्रभु की स्तुति करता हूँ जिसने मुझे फिर से परमेश्वर के अनमोल लोगों से मिलने के लिए प्रेरित किया है। मुझे आज तक एक खुशहाल जीवन जीने की आशीष देने के लिए मैं उनका तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ। परमेश्वर हमेशा मेरे साथ रहे हैं और मुझ पर दया की है, फिर भले ही कई बार मैंने निराश को महसूस किया, कई अलग-अलग अवसरों पर अपने भीतर कठिनाइयों, पीड़ा और कमजोरियों का अनुभव किया। वह जीवित रहा है और मेरे जीवन भर मेरे साथ रहा, मेरी परेशानियों और खुशियों दोनों में। ऐसा कोई अवसर नहीं था जब उसने मुझे अकेला छोड़ दिया, एक पल के लिए भी नहीं।   https://www.bjnewlife.org/ https://youtube.com/@TheNewLifeMission https://www.facebook.com/shin.john.35
Dec 8, 2022
24 min
Ch8-12. हमारा विरोधी कौन हो सकता है? (रोमियों ८:३१-३४)
रोमियों ८:३१-३४ में, पौलुस पानी और आत्मा के सुसमाचार को सारांशित करके और अपने अंतिम निष्कर्ष तक पहुँचने के द्वारा मसीह के विश्वासियों के अविभाज्य प्रेम की गवाही देता है। यह भाग विश्वास की उंचाई पर पहुंचे उद्धार के महान आनंद की घोषणा करता है। रोमियों ८:३१ में पौलुस ने कहा, “अत: हम इन बातों के विषय में क्या कहें? यदि परमेश्‍वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है?” पौलुस की तरह, हमने अनुभव किया है कि समय के साथ पानी और आत्मा का सुसमाचार फैलता है और हमारी कमजोरियों के प्रकट होने के साथ-साथ उद्धार का और भी बड़ा सुसमाचार बन जाता है। जितना अधिक हम पानी और आत्मा के सुसमाचार की सेवा करते हैं, उतना ही अधिक हम विश्वास और आनंद से भर जाते हैं।   https://www.bjnewlife.org/ https://youtube.com/@TheNewLifeMission https://www.facebook.com/shin.john.35
Dec 8, 2022
34 min
Ch8-9. सब बाते मिलकर भलाई को ही उत्पन्न करती है (रोमियों ८:२८-३०)
आज, हम रोमियों अध्याय ८ में उपरोक्त भाग पर विचार करना चाहेंगे। ऐसा कहा जाता है कि परमेश्वर ने हमें जो यीशु मसीह में है नियत किया, बुलाया, और महिमा दी है। हम इसके बारे में बात करेंगे, और यह भी बताएंगे कि लोग कैसे क्रमिक पवित्रता के सिद्धांत को समझते हैं।रोमियों ८:२८ कहता है, “हम जानते हैं कि जो लोग परमेश्‍वर से प्रेम रखते हैं, उनके लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती हैं; अर्थात् उन्हीं के लिये जो उसकी इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं।” हमें उनके बारें में सोचना है “जो परमेश्वर को प्रेम करते है”।   https://www.bjnewlife.org/ https://youtube.com/@TheNewLifeMission https://www.facebook.com/shin.john.35
Dec 8, 2022
32 min
Ch14. एक दूसरों का न्याय न करे
रोमियों १४:१ कहता है, “जो विश्‍वास में निर्बल है, उसे अपनी संगति में ले लो, परन्तु उसकी शंकाओं पर विवाद करने के लिये नहीं।”पौलुस ने रोम के संतों को चेतावनी दी कि वे एक दूसरे के विश्वास का न्याय या आलोचना न करें। उस समय, चूँकि रोम की कलीसिया में उन दोनों प्रकार के ही लोग थे जो बहुत विश्वासयोग्य थे और जो इतने विश्वासी नहीं थे, वे एक दूसरे के विश्वास की आलोचना करते थे। यदि आपके साथ ऐसा होता है, तो आपको एक-दूसरे के विश्वास का सम्मान करना चाहिए और परमेश्वर के सेवकों के खिलाफ किसी भी आलोचनात्मक व्यवहार से दूर रहना चाहिए। यह परमेश्वर पर निर्भर है, हम पर नहीं, की वह अपने सेवको को उठाए और बनाए।   https://www.bjnewlife.org/ https://youtube.com/@TheNewLifeMission https://www.facebook.com/shin.john.35
Dec 8, 2022
16 min
Ch8-5. परमेश्वर की धार्मिकता में चलना (रोमियों ८:१२-१६)
प्रेरित पौलुस एक ऐसा व्यक्ति जिसने परमेश्वर से उद्धार प्राप्त किया था, उसने कहा की नया जन्म पाए हुए विश्वासी को शरीर के अनुसार नहीं, लेकिन आत्मा के अनुसार जीना चाहिए। विशेष रूप से, पौलुस ने कहा कि यदि हम, जिनके पास परमेश्वर की धार्मिकता है, शरीर के अनुसार जीवन जिए, तो हम मर जायेंगे, परन्तु यदि हम आत्मा के अनुसार जीवन जिए, तो हम जीवित रहेंगे। इसलिए हमें इस सत्य पर विश्वास करना चाहिए। तो फिर, जो लोग परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करते हैं, उन्हें कैसे जीना चाहिए? क्या उन्हें परमेश्वर की धार्मिकता या शरीर की अभिलाषा के अनुसार जीवन जीना चाहिए? उन्हें पता होना चाहिए कि क्या सही है और अपने शरीर को परमेश्वर के धार्मिक कार्यों के लिए खुद को समर्पित करने के लिए अनुशासित करना चाहिए।   https://www.bjnewlife.org/ https://youtube.com/@TheNewLifeMission https://www.facebook.com/shin.john.35
Dec 8, 2022
7 min
Ch8-1. अध्याय ८ का परिचय
अध्याय ८ को शायद रोमियों की पुस्तक के सबसे महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में वर्णित किया जा सकता है। इस अध्याय में मौजूद कई विषयों के माध्यम से, पौलुस हमें प्रकट करता है कि परमेश्वर की धार्मिकता का कार्य कितना अद्भुत है।पहला विश्वे है: “अत: अब जो मसीह यीशु में है, उन पर दण्ड की आज्ञा नहीं” (रोमियों ८:१)। इसका मतलब है की चाहे हम अपनी देह में कितने भी अश्लील और तुच्छ क्यों न हो, परमेश्वर की धार्मिकता ने हमें हमारे सारे पापों से स्वतंत्र किया है।   https://www.bjnewlife.org/ https://youtube.com/@TheNewLifeMission https://www.facebook.com/shin.john.35
Dec 8, 2022
4 min
Ch7-1. अध्याय ७ का परिचय
इस तथ्य पर विचार करते हुए कि उसके छुटकारे से पहले उसके शरीर को परमेश्वर की व्यवस्था के द्वारा मौत की सजा दी गई थी, प्रेरित पौलुस ने विश्वास का अंगीकार किया कि वह यीशु मसीह में विश्वास करके, पाप के लिए मर गया था। इससे पहले कि हम परमेश्वर की धार्मिकता को प्राप्त करे—अर्थात, नया जन्म लेने से पहले—हम में से जो मसीह में विश्वास करते हैं, व्यवस्था के प्रभुत्व और अभिशाप के अधीन रहते थे। इस प्रकार, यदि यीशु मसीह से मुलाक़ात करने के द्वारा हमें हमारे पापों से मुक्त नहीं किया गया होता, जो हमें परमेश्वर की धार्मिकता के पास लेकर आया, तो व्यवस्था का हम पर प्रभुत्व होता।   https://www.bjnewlife.org/ https://youtube.com/@TheNewLifeMission https://www.facebook.com/shin.john.35
Dec 8, 2022
14 min
Ch9-1. अध्याय ९ का परिचय
पौलुस ने क्यों कहा कि उसके मन में अपने ही भाइयों के लिए बड़ा शोक है और उसका मन बड़ा दुखता रहता है? यह इसलिए है क्योंकि वह यहाँ तक चाहता था कि अपने भाइयों के लिये जो शरीर के भाव से उसके कुटुम्बी हैं, स्वयं ही मसीह से शापित हो जाता। अपने स्वयं की देह के अनुसार, वह वास्तव में अपने ही भाईयों को बचाना चाहता था।   https://www.bjnewlife.org/ https://youtube.com/@TheNewLifeMission https://www.facebook.com/shin.john.35
Dec 8, 2022
27 min
Ch12. परमेश्वर के सामने अपने मन को नया करे
“इसलिये हे भाइयो, मैं तुम से परमेश्‍वर की दया स्मरण दिला कर विनती करता हूँ कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्‍वर को भावता हुआ बलिदान करके चढ़ाओ। यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है” (रोमियों १२:१)”यह “उचित सेवा” क्या है, जिसका अनुवाद न्यू इंटरनेशनल वर्जन (NIV) में “आत्मिक सेवा के कार्य” के रूप में किया गया है, जिसे हमें परमेश्वर को देना चाहिए? परमेश्वर को उचित सेवा देने का अर्थ है अपने शरीर को उसके धर्मी कार्य करने के लिए समर्पित करना। चूँकि हम बचाए गए हैं, इसलिए हमें अपने शरीरों को अर्पण करने और धर्मी सुसमाचार के प्रसार के लिए परमेश्वर को स्वीकार्य होने की आवश्यकता है। हमें परमेश्वर को जो उचित सेवा देनी चाहिए, वह यह है कि हम अपने शरीरों को पवित्रता में अलग करके उन्हें सोंपना चाहिए।   https://www.bjnewlife.org/ https://youtube.com/@TheNewLifeMission https://www.facebook.com/shin.john.35
Dec 8, 2022
26 min
Ch10-2. सच्चा विश्वास सुनने के द्वारा होता है (रोमियों १०:१६-२१)
उद्धार प्राप्त करने के लिए हमें इन संदर्भो को कैसे समझना और उन पर विश्वास करना चाहिए? आरम्भ से ही न तो धर्मी थे और न ही परमेश्वर को खोजने वाले थे परन्तु सब पापी थे। उनके गले खुली हुई कब्रे थी; उनकी जिब जहरीले सांप की तरह, छल करनेवाली और शाप और कड़वाहट से भरी हुई थी। उनके पाँव लहू बहाने के लिए फुर्तीले थे। वे अपनी आँखों के सामने शान्ति का मार्ग या परमेश्वर के भय को नहीं जानते थे और केवल अपने विनाश और दुःख के मार्ग पर चलते थे। परमेश्वर की धार्मिकता को जानने और उस पर विश्वास करने से पहले हर कोई पापी था, और उन्होंने व्यवस्था के द्वारा यह जाना की वे परमेश्वर के सामने पापी थे।   https://www.bjnewlife.org/ https://youtube.com/@TheNewLifeMission https://www.facebook.com/shin.john.35
Dec 8, 2022
31 min
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