
Tum Yuhi Dekhti Raho Love Poem By Rajeev Singh
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Jan 21, 2021
4 min

समय समय की बात है.. अरे समय की ही तो बात है, की आज कल समय बिल्कुल नहीं हमारे पास वो भी क्या समय था.. जब समय हीं समय था सबके पास और एक आज का समय है, देख लो..यही की, बस समय समय की बात है| अब ये भी एक इतफाक देखो की समय कितना हुआ, ये घडी तय करती है; और आपके पास घडी कौन सी है ये समय तय करता है समय है तो अपने समय का बहुत पक्का निरंतर चला करता है अपनी राह और अपनी रफतार में.. परंतु इस दौड में घडी कभी कभी पिछे छूट जाती है और समय आगे निकल जाता.. फिर हम रह जाते हैं,बिखर जाते है; नए समय की तालाश में यही तो बस, समय समय की बात है|| फिर समय आता है अपने समय पर मरहम लेकर उस समय को भूल जाने को फिर समय बन जाता है सहारा तब जूट जाता है इंसां अच्छे समय के आ जाने पर, यही समय की चक्रवात है.. यही तो समय समय की बात है||
धन्यवाद / आभार
Singh D. Rajeev
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Jan 20, 2021
1 min

Zindagi teri daud mein ,maine bhagna sikha hai,
kitni neendein haram krke, jagna sikha hai...
jab dard bayan na ho paya zubaan se,
to bezubaan hokar likhna sikha hai....
zindagi teri daud mein maine bhagna sikha hai...
Bahut toda hai logon ne mujhe,
har kadam mera ladkhadaya hai..
par aaj bhi khada hu mai, apne dum pe,
Kyunki tute takdir ko maine sawarna sikha hai...
zindagi teri daud mein,
maine Bhagna sikha hai..
Chal laga baazi ki ye juaa kaun jeetega...×2
Maine Khud ka Dil haarkar,
dusro ko jeetna sikha hai...
Zindagi teri daud mein....
Phenkta reh tu patthar meri ore,
Mujhe koi parwah nhi...
Par ye yaad dila du tujhe,
ki kalakar hu mai..
Unn pattharon ko murti bnana sikha hai...
Zindagi teri daud mein maine bhagna sikha hai...
Rajeev Singh
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Jan 19, 2021
2 min

मुनासिब नहीं की बैठ जाऊ मैं थक कर,
हिम्मत कर दो कदम मुझे बढ़ाना ही होगा ।
बस थोड़ा पस्त हुआ हूँ, परास्त नहीं मैं
फिर से सम्बल उठाना ही होगा ।।
सबकी अपनी रफ़्तार थी,
कोई धीमी कोई तेज़ गति से निकल गया ।
मेरी गुमनामी में मुझे छोड़ जाने वालों,
एक दिन तुम्हे वापस आना ही होगा ।।
मुनासिब नहीं की बैठ जाऊ मैं थक कर,
हिम्मत कर दो कदम मुझे बढ़ाना ही होगा ।।
खुद कामयाबी हाथ आएगी, ऐसा नहीं चाहता मैं
कुआं कभी आएगा प्यासे के पास, ऐसा नहीं सोचता मैं ।
कही इस आस में प्यास से न मर जाऊं मैं,
दबे पाँव उस तक मुझे जाना ही होगा ।।
मुनासिब नहीं की बैठ जाऊ मैं थक कर,
हिम्मत कर दो कदम मुझे बढ़ाना ही होगा ।।
अवशेष दबे पड़े है पाताल में,
कुछ कोयले कुछ लोहे बन जायेंगे।
बेशक मुझे और दबा दे विधाता,
तुम्हें मुझे हीरा बनाना ही होगा।।
मुनासिब नहीं की बैठ जाऊ मैं थक कर,
हिम्मत कर दो कदम मुझे बढ़ाना ही होगा ।।
मुनासिब नहीं की बैठ जाऊ मैं थक कर,
हिम्मत कर दो कदम मुझे बढ़ाना ही होगा ।
बस थोड़ा पस्त हुआ हूँ, परास्त नहीं मैं
फिर से सम्बल उठाना ही होगा ।।
Penned and Recited by Rajeev Singh
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Jan 17, 2021
3 min
