समय समय की बात है.. अरे समय की ही तो बात है, की आज कल समय बिल्कुल नहीं हमारे पास वो भी क्या समय था.. जब समय हीं समय था सबके पास और एक आज का समय है, देख लो..यही की, बस समय समय की बात है| अब ये भी एक इतफाक देखो की समय कितना हुआ, ये घडी तय करती है; और आपके पास घडी कौन सी है ये समय तय करता है समय है तो अपने समय का बहुत पक्का निरंतर चला करता है अपनी राह और अपनी रफतार में.. परंतु इस दौड में घडी कभी कभी पिछे छूट जाती है और समय आगे निकल जाता.. फिर हम रह जाते हैं,बिखर जाते है; नए समय की तालाश में यही तो बस, समय समय की बात है|| फिर समय आता है अपने समय पर मरहम लेकर उस समय को भूल जाने को फिर समय बन जाता है सहारा तब जूट जाता है इंसां अच्छे समय के आ जाने पर, यही समय की चक्रवात है.. यही तो समय समय की बात है||
धन्यवाद / आभार
Singh D. Rajeev
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