Footri Stories
Footri Stories
Santhosh Joseph
Kids stories help to develop a child’s imagination by introducing new ideas into their world, encouraging them and making them realise that they can, and should imagine anything they want. Join footri stories by Santhosh Joseph and delve into fascinating world of kids stories where happiness comes along with learnings.
Cup Of Tea | चाय का प्याला
Story of 15 soldiers and their commanding officers, how a cup of tea changed their view towards life. --- Send in a voice message: https://podcasters.spotify.com/pod/show/footristories/message
Jun 26, 2021
8 min
Snake and Frog Story | सांप की सावरी की कहानी
Story of an old snake, how he makes up a story and fools a pond full of frogs and eats them at ease. Youtube : https://www.youtube.com/channel/UCQo6BYqucUE-z3ro0YIhOiA | Voice messages : https://www.speakpipe.com/footristories | Reviews : https://www.podchaser.com/users/footristories --- Send in a voice message: https://podcasters.spotify.com/pod/show/footristories/message
Jun 17, 2021
5 min
Blue Jackal Story | नीले सियार की कहानी
Blue Jackal Story - how a jackal fell into a tub full of indigo and he got the idea and fooled all animals and finally was caught and killed by the same animals who he was fooling for so long. Youtube : https://www.youtube.com/channel/UCQo6BYqucUE-z3ro0YIhOiA | Voice messages : https://www.speakpipe.com/footristories | Reviews : https://www.podchaser.com/users/footristories --- Send in a voice message: https://podcasters.spotify.com/pod/show/footristories/message
Jun 12, 2021
6 min
Monkey And Bird Story | गौरैया और बंदर की कहानी
गौरैया और बंदर की कहानी | Monkey And Bird Story In Hindi एक बार की बात है, एक जंगल के किसी घने पेड़ पर एक गौरैया का जोड़ा रहता था। वो उस पेड़ पर अपना घोंसला बनाकर गुजर-बसर करते थे। दोनों खुशी-खुशी अपना जीवन बीता रहे थे। फिर आया सर्दियों का मौसम, इस बार बहुत ही कड़ाके की ठंड पड़ने लगी। ठंड से बचने के लिए एक दिन कुछ बंदर उस पेड़ के नीचे ठिठुरते हुए पहुंचे। तेज ठंडी हवाओं से सभी बंदर कांप रहे थे और बहुत ही परेशान थे। पेड़ के नीचे बैठने के बाद वो आपस में बात करने लगे कि काश कहीं से आग सेंकने को मिल जाती तो ठंड दूर हो जाती। उसी बीच एक बंदर की नजर पास पड़ी सूखी पत्तियों पर पड़ी। उसने दूसरे बंदरों से कहा, “चलो इन सूखी पत्तियों को इकट्ठा करके जलाते हैं।” उन बंदरों ने पत्तियों को एक जगह इकट्ठा किया और उन्हें जलाने का उपाय करने लगे। ये सब पेड़ पर बैठी गौरैया देख रही थी। ये सब देखकर उससे रहा नहीं गया और वो बंदरों से बोल पड़ी, “तुम लोग कौन हो?, देखने में तो तुम आदमियों की तरह लग रहे हो, हाथ-पैर भी हैं, तुम अपना घर बनाकर क्यों नहीं रहते?” गौरेया की बात सुनकर ठंड से कांप रहे बंदर चिढ़ गए और बोले, “तुम अपना काम करो, हमारे काम में पड़ने की जरूरत नहीं है।” इतना कहने के बाद वो फिर आग जलाने के बारे में सोचने लगे और अलग-अलग तरीके अपनाने लगे। इतने में बंदरों की नजर एक जुगनू पर पड़ी। वो चिल्लाने लगा, “देखो ऊपर हवा में चिंगारी है, इसे पकड़कर आग जलाते हैं।” यह सुनते ही सारे बंदर उसे पकड़ने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाने लगे। ये देख चिड़िया फिर बोल पड़ी, “यह जुगनू है, इससे आग नहीं सुलगेगी।” तुम लोग दो पत्थरों को घिसकर आग जला सकते हो।” बंदरों ने चिड़िया की बात को अनसुना कर दिया। कई कोशिश के बाद उन्होंने जुगनू को पकड़ लिया और फिर उससे आग जलाने की कोशिश करने लगे, पर वो इस काम में कामयाब नहीं हो पाए और जुगनू उड़ गया। इससे बंदर निराश हो गए। इतने में फिर से गौरेया बोल उठी, “आप लोग मेरी बात मानिए, पत्थर रगड़कर आप आग जला सकते हैं।” इतने में एक गुस्साए हुए बंदर से रहा न गया और उसने पेड़ पर चढ़कर गौरेया के घोसले को तोड़ दिया। यह देख चिड़िया दुखी हो गई और डर कर रोने लगी। इसके बाद वो उस पेड़ से उड़कर कहीं और चली गई। कहानी से सीख जरूरी नहीं कि हर किसी को ज्ञान या उपदेश दिया जाए। उपदेश उसी को दिया जाना चाहिए जो समझदार हो और बातों को समझे। बेवकूफ को उपदेश देने से खुद का ही बुरा हो सकता है। --- Send in a voice message: https://podcasters.spotify.com/pod/show/footristories/message
Jun 2, 2021
5 min
Bagula Aur Kekda Ki Kahani | बगुला और केकड़ा की कहानी
Bagula Aur Kekda Ki Kahani | बगुला और केकड़ा  यह कहानी है एक जंगल की जहां एक आलसी बगुला रहा करता था। वह इतना आलसी था कि कोई काम करना तो दूर, उससे अपने लिए खाना ढूंढने में भी आलस आता था। अपने इस आलस के कारण बगुले को कई बार पूरा-पूरा दिन भूखा रहना पड़ता था। नदी के किनारे अपनी एक टांग पर खड़े-खड़े दिन भर बगुला बिना मेहनत किए खाना पाने की युक्तियां सोचा करता था। एक बार की बात है, जब बगुला ऐसी ही कोई योजना बना रहा था और उसे एक आइडिया सूझा। तुरंत ही वह उस योजना को सफल बनाने में जुट गया। वह नदी के किनारे एक कोने में जाकर खड़ा हो गया और मोटे-मोटे आंसू टपकाने लगा। उसे इस प्रकार रोता देख केंकड़ा उसके पास आया और उससे पूछा, “अरे बगुला भैया, क्या बात है? रो क्यों रहे हो?” उसकी बात सुनकर बगुला रोते-रोते बोला, “क्या बताऊं केंकड़े भाई, मुझे अपने किए पर बहुत पछतावा हो रहा है। अपनी भूख मिटाने के लिए मैंने आज तक न जाने कितनी मछलियों को मारा है। मैं कितना स्वार्थी था, लेकिन आज मुझे इस बात का एहसास हो गया है और मैंने यह वचन लिया है कि अब मैं एक भी मछली का शिकार नहीं करूंगा।” बगुले की बात सुन कर केंकड़े ने कहा, “अरे ऐसा करने से तो तुम भूखे मर जाओगे।” इस पर बगुले ने जवाब दिया, “किसी और की जान लेकर अपना पेट भरने से तो भूखे पेट मर जाना ही अच्छा है, भाई। वैसे भी मुझे बाबा मिले थे और उन्होंने मुझसे कहा कि कुछ ही समय में 12 साल के लिए सूखा पड़ने वाला है, जिस कारण सब मर जाएंगे।” केंकड़े ने जाकर यह बात तालाब के सभी जीवों को बता दी। “अच्छा,” तालाब में रहने वाले कछुए ने चौंक कर पूछा, “तो फिर इसका क्या हल है?” इस पर बगुले भगत ने कहा, “यहां से कुछ कोस दूर एक तालाब है। हम सभी उस तालाब में जाकर रह सकते हैं। वहां का पानी कभी नहीं सूखता। मैं एक-एक को अपनी पीठ पर बैठा कर वहां छोड़कर आ सकता हूं।” उसकी यह बात सुनकर सारे जानवर खुश हो गए। अगले दिन से बगुले ने अपनी पीठ पर एक-एक जीव को ले जाना शुरू कर दिया। वह उन्हें नदी से कुछ दूर ले जाता और एक चट्टान पर ले जाकर मार डालता। कई बार वह एक बार में दो जीवों को ले जाता और भर पेट भोजन करता। उस चट्टान पर उस जीवों की हड्डियों का ढेर लगने लगा था। बगुला अपने मन में सोचा करता था कि दुनिया भी कैसे मूर्ख है। इतनी आसानी से मेरी बातों में आ गए। ऐसा कई दिनों तक चलता रहा। एक दिन केंकड़े ने बगुले से कहा, “बगुला भैया, तूम हर रोज किसी न किसी को ले जाते हो। मेरा नंबर कब आएगा?” तो बगुले ने कहा, “ठीक है, आज तुम्हें ले चलता हूं।” यह कहकर उसने केंकड़े को अपनी पीठ पर बिठाया और उड़ चला। जब वो दोनों उस चट्टान के पास पहुंचे, तो केंकड़े ने वहां अन्य जीवों की हड्डियां देखी और उसका दिमाग दौड़ पड़ा। उसने तुरंत बगुले से पूछा कि ये हड्डियां किसकी हैं और जलाशय कितना दूर है? उसकी बात सुनकर बगुला जोर जोर से हंसने लगा और बोला, “कोई जलाशय नहीं है और ये सारी तुम्हारे साथियों की हड्डियां हैं, जिन्हें मैं खा गया। इन सभी हड्डियों में अब तुम्हारी हड्डियां भी शामिल होने वाली हैं।” उसकी यह बात सुनते ही केंकड़े ने बगुले की गर्दन अपने पंजों से पकड़ ली। कुछ ही देर में बगुले के प्राण निकल गए। इसके बाद, केंकड़ा लौट कर नदी के पास गया और अपने बाकी साथियों को सारी बात बताई। उन सभी ने केंकड़े को धन्यवाद दिया और उसकी जय जयकार की। कहानी से सीख इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें आंख बंद करके किसी पर विश्वास नहीं करना चाहिए। मुसीबत के समय भी संयम और बुद्धिमानी से काम करना चाहिए। --- Send in a voice message: https://podcasters.spotify.com/pod/show/footristories/message
Jun 1, 2021
6 min
ब्राह्मण और सांप (Brahman Aur Saap)
एक बार की बात है किसी नगर में एक ब्राह्मण रहता था। उसके पास काफी खेत थे, लेकिन उनमें ज्यादा पैदावार नहीं होती थी। एक दिन ब्राह्मण अपने खेत में एक पेड़ के नीचे सोया हुआ था। जैसे ही ब्राह्मण की आंख खुली उसने देखा कि एक सांप अपना फन फैलाए बैठा हुआ है। ब्राह्मण को अहसास हुआ कि यह कोई साधारण सांप नहीं है, बल्कि कोई देवता है। ब्राह्मण ने निर्णय लिया कि वह आज से इस देवता की पूजा करेगा। ब्राह्मण उठा और जाकर दूध ले आया और उसने एक मिटटी के बर्तन में दूध दाल कर सांप को दूध पिलाया। दूध पिलाते समय ब्राह्मण ने सांप से क्षमा मांगते हुए कहा कि हे देव! मैंने आपको साधारण सांप समझा, इसके लिए आप मुझे माफ कर दीजिए। अपनी कृपा दृष्टि से मुझे बहुत सारा धन-धान्य प्रदान करें प्रभु। ऐसा कहकर ब्राह्मण अपने घर वापस आ गया। अगले दिन जब वह अपने खेत पहुंचा, तो उसने देखा कि जिस बर्तन में उसने सांप को दूध पिलाया था, उसमें एक सोने का सिक्का पड़ा हुआ है। अब ब्राह्मण रोज सांप की पूजा करने लगा और सांप रोज उसे एक सोने का सिक्का देने लगा। कुछ दिन बाद ब्राह्मण को किसी जरुरी काम से दूर किसी देश जाना पड़ा, तो उसने अपने बेटे से कहा कि तुम खेत में जाकर सांप देवता को दूध पिला आना। अपने पिता की आज्ञा से ब्राह्मण का बेटा खेत में गया और सांप के बर्तन में दूध रख आया। अगली सुबह जब वह सांप को दूध पिलाने गया, तो उसने देखा कि वहां सोने का सिक्का रखा हुआ है। ब्राह्मण के बेटे ने वो सोने का सिक्का उठा लिया और मन ही मन सोचने लगा कि जरूर इस सांप के बिल में सोने का भंडार है। उसने सांप के बिल को खोदने का फैसला किया, लेकिन उसे सांप का बहुत डर था। ब्राह्मण के बेटे ने योजना बनाई कि जैसे ही सांप दूध पीने आएगा, तो वह उसके सिर पर लाठी से वार करेगा, जिससे सांप मर जाएगा। सांप के मरने के बाद मैं तसल्ली से बिल खोदूंगा और उसमें से सोना निकाल कर अमीर आदमी बन जाऊंगा। लड़के ने अगले दिन ऐसा ही किया, लेकिन जैसे ही उसने सांप के सिर पर लाठी मारी, तो सांप मरा नहीं बल्कि गुस्से से भर उठा। सांप ने क्रोध में लड़के के पैर में अपने विष भरे दांतों से काटा और लड़के की उसी समय मौत हो गई। ब्राह्मण जब वापस लौटा, तो उसे यह जानकर बहुत दुःख हुआ। कहानी से सीख - लालच का फल हमेशा बुरा होता है, इसीलिए कहते है कि कभी लालच नहीं करना चाहिए। हमारे पास जो भी हमें उसी से संतोष करना चाहिए और हमेशा परिश्रम करते रहना चाहिए। --- Send in a voice message: https://podcasters.spotify.com/pod/show/footristories/message
May 29, 2021
4 min
साधु और चूहा (The Hermit And The Mouse)
कहानी से सीख : संसाधनों के अभाव में आत्मविश्वास की कमी हो जाती है। इसलिए, जो भी संसाधन आपके पास हों, उसका ध्यान रखना चाहिए। --- Send in a voice message: https://podcasters.spotify.com/pod/show/footristories/message
May 28, 2021
5 min
बैल और शेर की कहानी (Lion And Three Bulls)
कहानी से सीख : एकता में बड़ी ताकत होती है। हमें हमेशा आपस में मिलकर रहना चाहिए और दूसरों की बातों में नहीं आना चाहिए। --- Send in a voice message: https://podcasters.spotify.com/pod/show/footristories/message
May 24, 2021
3 min
लालची कुत्ते की कहानी (Greedy Dog)
कहानी से सीख - इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें कभी भी लालच नहीं करना चाहिए। लालच करने से हमारा ही नुकसान होता है। --- Send in a voice message: https://podcasters.spotify.com/pod/show/footristories/message
May 24, 2021
2 min
एक घमंडी हाथी और चींटी की कहानी (Ghamandi Hathi Aaur Chiti)
कहानी से सीख - हमें अपनी ताकत पर कभी घमंड नहीं करना चाहिए। अपनी ताकत के जोर पर दूसरों को परेशान करने की जगह उनकी मदद करनी चाहिए। --- Send in a voice message: https://podcasters.spotify.com/pod/show/footristories/message
May 24, 2021
3 min
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