Footri Stories
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Santhosh Joseph
ब्राह्मण और सांप (Brahman Aur Saap)
4 minutes Posted May 29, 2021 at 7:44 pm.
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एक बार की बात है किसी नगर में एक ब्राह्मण रहता था। उसके पास काफी खेत थे, लेकिन उनमें ज्यादा पैदावार नहीं होती थी। एक दिन ब्राह्मण अपने खेत में एक पेड़ के नीचे सोया हुआ था। जैसे ही ब्राह्मण की आंख खुली उसने देखा कि एक सांप अपना फन फैलाए बैठा हुआ है। ब्राह्मण को अहसास हुआ कि यह कोई साधारण सांप नहीं है, बल्कि कोई देवता है। ब्राह्मण ने निर्णय लिया कि वह आज से इस देवता की पूजा करेगा। ब्राह्मण उठा और जाकर दूध ले आया और उसने एक मिटटी के बर्तन में दूध दाल कर सांप को दूध पिलाया।

दूध पिलाते समय ब्राह्मण ने सांप से क्षमा मांगते हुए कहा कि हे देव! मैंने आपको साधारण सांप समझा, इसके लिए आप मुझे माफ कर दीजिए। अपनी कृपा दृष्टि से मुझे बहुत सारा धन-धान्य प्रदान करें प्रभु। ऐसा कहकर ब्राह्मण अपने घर वापस आ गया।

अगले दिन जब वह अपने खेत पहुंचा, तो उसने देखा कि जिस बर्तन में उसने सांप को दूध पिलाया था, उसमें एक सोने का सिक्का पड़ा हुआ है। अब ब्राह्मण रोज सांप की पूजा करने लगा और सांप रोज उसे एक सोने का सिक्का देने लगा।

कुछ दिन बाद ब्राह्मण को किसी जरुरी काम से दूर किसी देश जाना पड़ा, तो उसने अपने बेटे से कहा कि तुम खेत में जाकर सांप देवता को दूध पिला आना। अपने पिता की आज्ञा से ब्राह्मण का बेटा खेत में गया और सांप के बर्तन में दूध रख आया। अगली सुबह जब वह सांप को दूध पिलाने गया, तो उसने देखा कि वहां सोने का सिक्का रखा हुआ है।

ब्राह्मण के बेटे ने वो सोने का सिक्का उठा लिया और मन ही मन सोचने लगा कि जरूर इस सांप के बिल में सोने का भंडार है। उसने सांप के बिल को खोदने का फैसला किया, लेकिन उसे सांप का बहुत डर था। ब्राह्मण के बेटे ने योजना बनाई कि जैसे ही सांप दूध पीने आएगा, तो वह उसके सिर पर लाठी से वार करेगा, जिससे सांप मर जाएगा। सांप के मरने के बाद मैं तसल्ली से बिल खोदूंगा और उसमें से सोना निकाल कर अमीर आदमी बन जाऊंगा।

लड़के ने अगले दिन ऐसा ही किया, लेकिन जैसे ही उसने सांप के सिर पर लाठी मारी, तो सांप मरा नहीं बल्कि गुस्से से भर उठा। सांप ने क्रोध में लड़के के पैर में अपने विष भरे दांतों से काटा और लड़के की उसी समय मौत हो गई। ब्राह्मण जब वापस लौटा, तो उसे यह जानकर बहुत दुःख हुआ।

कहानी से सीख - लालच का फल हमेशा बुरा होता है, इसीलिए कहते है कि कभी लालच नहीं करना चाहिए। हमारे पास जो भी हमें उसी से संतोष करना चाहिए और हमेशा परिश्रम करते रहना चाहिए।

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