Ep8_Master Ji in Tashkent_TeacherParv_ताशकंद से बातें_After Getting Back from India, Ice Hockey at Humo Arena, Boba Tea, ShivRatri and More of Life
घर से ताशकंद लौटने के बाद ये पहला एपिसोड है. 1 फ़रवरी से आज तक जो हुआ वो सब तो नहीं पर कुछ अनुभव हैं इसमें। सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की कविता, कुश शेर, आइस-हॉकी देखने का अनुभव, पुरानी बड़ी गाड़ियों का संग्रह, बोबा चाय और आइस क्रीम, एकलव्य का नया रूप, शिव को नमन करते हुए जीवन के कुछ सबक - कुछ इधर उधर की बातें!
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तुम्हारे साथ रहकर
अक्सर मुझे लगा है
कि हम असमर्थताओं से नहीं
संभावनाओं से घिरे हैं,
हर दीवार में द्वार बन सकता है
और हर द्वार से पूरा का पूरा
पहाड़ गुज़र सकता है।
शक्ति अगर सीमित है
तो हर चीज़ अशक्त भी है,
भुजाएँ अगर छोटी हैं,
तो सागर भी सिमटा हुआ है,
सामर्थ्य केवल इच्छा का दूसरा नाम है,
जीवन और मृत्यु के बीच जो भूमि है
वह नियति की नहीं मेरी है।
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