Vidyantriksh Parenting Series | Ep12 | Why Perfect Children | परफेक्ट बच्चे क्यूँ | TeacherParv Podcasts
(Amit Dagar & Dr Aarti)
सबको परफ़ेक्ट बच्चे चाहियें - पढाई में अच्छे, तरह-तरह के टैलेंट से भरे, आज्ञाकारी, किसी प्रकार का अनुचित वयवहार ना करने वाले, आदि आदि। लेकिन परफेक्ट बच्चे (और परफेक्ट पेरेंट्स भी) सिर्फ फिल्मों में होते हैं जो DDLJ के शाहरुख़ की तरह फेल होकर भी खुश रहते हैं, गिटार और पियानो बजा लेते हैं, गाना गा लेते हैं, घुड़सवारी और तैराकी कर लेते हैं, दुनियाभर की शरारतें करते हैं, और फिर जरूरत पड़ने पर एकदम संस्कारी हो जाते हैं।
सच तो ये है कि बच्चे परफ़ेक्ट होने के लिए होते ही नहीं।
परफ़ेक्ट तो प्रोडक्ट होते हैं। और हमारे बच्चे कोई प्रोडक्ट नहीं। बच्चे तो झूठ भी बोलते हैं, जिद्द भी करते हैं, शरारतें भी करते हैं, छोटी-मोटी चोरी भी करते हैं, कहना भी नहीं मानते, पढाई में फेल भी हो जाते हैं, अपने भविष्य के प्रति लापरवाह भी होते हैं आदि। और न जाने कितनी आदतें उनमे होती हैं जो हमें पसंद नहीं होती।
तो ऐसे बच्चे किसे पसंद होंगे। किसी को नहीं। अधिकतर पेरेंट्स के ऐसे बच्चों के साथ रिश्ते बढ़िया नहीं होते। धीरे-धीरे पेरेंट्स इन्हें नकारा-निकम्मा कहकर बिलकुल ध्यान देना छोड़ देते हैं। गलत है। तो क्या करें।
सबसे पहले तो समझिये कि क्या बच्चे हमारी पसंद-नापसंद के लिए बने हैं? दूसरा, अपने बच्चों को परफेक्शन के तराज़ू में तोलना बंद करें। हमें उन्हें पैंट-शर्ट की तरह नहीं देखना चाहिए जिन्हें हम कांट-छाँटकर करके अपने साइज (सोच) के हिसाब से तैयार करवा सकते हैं। बच्चे हैं। उसके बाद समझिये कि उनके किस वयवहार को आप इग्नोर करेंगे और किस पर आपको उन्हें कॉउंसेल करने की जरूरत है (ये आपकी पेरेंटिंग स्टाइल पर निर्भर होगा)।
पेरेंटिंग में सबसे महत्वपूर्ण है- धैर्य, जो सुनील दत्त जैसा चाहिए (जिन्होंने हज़ार कमियों के बाद भी अपने बेटे संजय दत्त का साथ नहीं छोड़ा)। इन सारी बातों का निचोड़ ये है कि हज़ार कमियों के बाद भी अपने बच्चों को प्यार करने के बहाने ढूंढिए। आपने उन्हें जन्म दिया है।
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