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सूखी बंजर हो चाहे चाहे मुश्किल हो सफ़र हर अधूरे एहसास में छिपी आस को चुना है मैंने जीवन को चुना है पत्ते झड़ते शाखों से फूल बहुत से मुरझाते माटी में झड़ जाते बीज बीज ने फिर से जीवन को चुना है मैंने जीवन को चुना है।हर हालत में हर हालात में ईश्वर की कायनात केरहस्य में छिपी खुशी को चुना है हां, मैंने जिंदगी को चुना है….रुचि हर्ष

