परमेश्वर की धार्मिकता जो रोमियों में प्रगट हुई - हमारा प्रभु जो परमेश्वर की धार्मिकता बना ( I )
परमेश्वर की धार्मिकता जो रोमियों में प्रगट हुई - हमारा प्रभु जो परमेश्वर की धार्मिकता बना ( I )
The New Life Mission
पानी और आत्मा का सुसमाचार परमेश्वर की धार्मिकता है! इस किताब के शब्द आपके हृदय की प्यास बुझाएँगे। आज के मसीही हरदिन जो पाप करते है उसके सच्चे समाधान को जाने बिना वे अपना जीवन जीते है। क्या आप जानते है की परमेश्वर की धार्मिकता क्या है? मैं आशा करता हूँ की आप खुद से यह प्रश्न पुछेंगे और परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करेंगे, जो इस किताब में प्रगट की गई है। परमेश्वर की धार्मिकता पानी और आत्मा के सुसमाचार से है। फिर भी, मूल्यवान खजाने के जैसे उसे धार्मिक चेलों की नज़र से लम्बे समय से छूपा के रखा है। परिणाम के तौर पर, कई लोग परमेश्वर की धार्मिकता की जगह अपनी धार्मिकता पर निर्भर रहते है और अभिमान करते है। हालाँकि, मसीही सिध्धांत विश्वासियों के हृदय में मुख्य बात बने ऐसा नहीं लगता, जैसे की इस सिध्धांतो में परमेश्वर की धार्मिकता है। पूर्वनिर्धारणा, न्याय और क्रमिक पवित्रता के सिध्धांत मसीहियत के मुख्य सिध्धांत है, जो विश्वासियों के जीवन में परेशानी और खालीपन भर देते है। लेकिन अब, मसीहियों को परमेश्वर को जानना चाहिए, उनकी धार्मिकता के बारे में सीखना चाहिए और निश्चित विश्वास में आगे बढ़ना चाहिए। “हमारा प्रभु जो परमेश्वर की धार्मिकता बना” आपको उत्तम समझ का आत्मा देगा और शांति की ओर आपको लेजर जाएगा। लेखक यह इच्छा रखते है की आप परमेश्वर की धार्मिकता को पहिचानने की आशीष प्राप्त करे। परमेश्वर की आशीष आपके साथ रहे!
Ch3-2. केवल विश्वास के द्वारा पापों से उद्धार (रोमियों ३:१-३१)
प्रेरित पौलुस कहता है कि व्यवस्था की पूर्ति और परमेश्वर के अनुग्रह का छुटकारा हमें हमारे कर्मो से नहीं, लेकिन विश्वास के द्वारा दिया गया है। हम अपने पापों से उद्धार पाते हैं और परमेश्वर के उद्धार के द्वारा धर्मी बन जाते हैं। “अत: यहूदी की क्या बड़ाई या खतने का क्या लाभ? हर प्रकार से बहुत कुछ। पहले तो यह कि परमेश्‍वर के वचन उनको सौंपे गए। यदि कुछ विश्‍वासघाती निकले भी तो क्या हुआ? क्या उनके विश्‍वासघाती होने से परमेश्‍वर की सच्‍चाई व्यर्थ ठहरेगी? कदापि नहीं!” (रोमियों ३:१-४)।यहूदी का लाभ यह है कि परमेश्वर का वचन उनके लिए प्रतिबद्ध था। वे अपने पूर्वजों से उसका वचन सुनते हुए जीवित रहे। क्योंकि परमेश्वर ने उन्हें अपना वचन दिया था और यह उनके द्वारा दिया गया था, वे सोचते थे कि वे अन्यजातियों से बेहतर थे। हालाँकि, बाइबल कहती है कि परमेश्वर ने यहूदियों को छोड़ दिया क्योंकि उन्होंने यीशु पर विश्वास नहीं किया जिसने उन्हें उनके पापों से छुड़ाया था।   https://www.bjnewlife.org/ https://youtube.com/@TheNewLifeMission https://www.facebook.com/shin.john.35
Dec 8, 2022
58 min
Ch1-4. विश्वास से धर्मी जन जीवित रहेगा (रोमियों १:१७-१८)
ऐसा लिखा है, “धर्मी जन विश्वास से जीवित रहेगा।” क्या हम विश्वास से जीते हैं या नहीं? विश्वास ही केवल एकमात्र तरीका है जिसके द्वारा धर्मी जीवनजो सकता है। विश्वास न्यायी को जीने देता है। जब हम परमेश्वर पर विश्वास करते हैं तो हम सब चीजों के साथ जी सकते हैं और आगे बढ़ सकते हैं। केवल धर्मी जन विश्वास से जीते हैं। ‘केवल’ शब्द का अर्थ है कि धर्मी को छोड़कर कोई भी विश्वास से नहीं जी सकता। फिर पापियों के बारे में क्या? पापी विश्वास से नहीं जी सकते। क्या अब आप विश्वास से जीते हैं? हमें विश्वास से ही जीना चाहिए।   https://www.bjnewlife.org/ https://youtube.com/@TheNewLifeMission https://www.facebook.com/shin.john.35
Dec 8, 2022
17 min
Ch5-2. एक मनुष्य के द्वारा (रोमियों ५:१४)
आज मैं पाप की उत्पत्ति के बारे में बात करना चाहता हूँ। आप ऐसा मत सोचिए की, “आप हर दिन एक ही तरह की बातें करते हो। मुझे अन्य चीजों के बारे में बताइए।” मैं चाहता हूँ कि आप ध्यान से सुनें। सुसमाचार सबसे कीमती चीज है। यदि कोई संत जिसके पापों को मिटा दिया गया है, वह हर दिन उसे याद दिलाने के लिए बार-बार सुसमाचार नहीं सुनता है, तो वह मर जाएगा। वह पानी और आत्मा के सुसमाचार को सुने बिना कैसे जीवित रह सकता है? उसके जीने का एकमात्र तरीका सुसमाचार को सुनना है। आइए बाइबल खोलें और इसके वास्तविक अर्थों को साझा करें।   https://www.bjnewlife.org/ https://youtube.com/@TheNewLifeMission https://www.facebook.com/shin.john.35
Dec 8, 2022
1 hr
Ch4-2. वे जिन्होंने विश्वास से स्वर्गीय आशीषों को पाया है (रोमियों ४:१-८)
मैं इन दिनों कई आत्माओं को बचाने के लिए प्रभु को धन्यवाद देता हूं। बाइबल रोमियों अध्याय ४ में धन्य लोगों के बारे में बात करती है, इसलिए मैं उन लोगों के बारे में बात करना चाहता हूँ जिन्हें आशीष दी गई है।“जिसे परमेश्‍वर बिना कर्मों के धर्मी ठहराता है, उसे दाऊद भी धन्य कहता है: “धन्य हैं वे जिनके अधर्म क्षमा हुए, और जिनके पाप ढाँपे गए। धन्य है वह मनुष्य जिसे परमेश्‍वर पापी न ठहराए” (रोमियों ४:६-८)। बाइबल उन लोगों के बारे में बात करती है जो परमेश्वर के सामने धन्य है। वास्तव में धन्य वे है जिनके पाप परमेश्वर के सामने मिटा दी गए है और जिन्हें परमेश्वर पापी नहीं ठहराता।   https://www.bjnewlife.org/ https://youtube.com/@TheNewLifeMission https://www.facebook.com/shin.john.35
Dec 8, 2022
33 min
Ch2-2. वे जो परमेश्वर के अनुग्रह को नकारते है (रोमियों २:१-१६)
आइए हम व्यवस्था के बारे में बात करे। प्रेरित पौलुस ने व्यवस्था पर आधार रखनेवाले यहूदियों को कहा, “अंत: हे दोष लगानेवाले, तू कोई क्यों न हो, तू निरुत्तर है; क्योंकि जिस बात में तू दुसरे पर दोष लगाता है उसी बात में अपने आप को भी दोषी ठहराता है, इसलिए की तू जो दोष लगाता है स्वयं ही वह काम करता है। हे मनुष्य, तू जो ऐसे ऐसे काम करनेवालों पर दोष लगाता है और आप वे ही काम करता है; क्या यह समझता है की तू परमेश्वर की दण्ड की आज्ञा से बच जाएगा?” (रोमियों २:१-३) विधि-सम्मत लोग सोचते है की वे ठीक रीति से परमेश्वर का आदर करते है। इस प्रकार के लोग अपने हृदय से परमेश्वर पर विश्वास नहीं करते, लेकिन अपने गलत घमंड के द्वारा विश्वास करते है जो उनके खुद के कर्मो पर आधारित है। ऐसे लोगों को दूसरों का न्याय करना अच्छा लगता है और वे इस कार्य में कुशल है। हालाँकि, जब वे परमेश्वर के वचन से दूसरों का न्याय करते है, तब उन्हें पता नहीं चलता है की वे भी ठीक उन लोगों की तरह ही है जिनकी टिका हो रही है आर वे भी ऐसी ही गलती कर रहे है।   https://www.bjnewlife.org/ https://youtube.com/@TheNewLifeMission https://www.facebook.com/shin.john.35
Dec 8, 2022
31 min
Ch1-1. रोमियों अध्याय १ का परिचय
“रोमियों को प्रेरित पौलुस की पत्री” को बाइबल के खजाने के रूप में संदर्भित किया जा सकता है। यह मुख्य तौर पर इस बारे में बात करता है की कैसे कोई व्यक्ति पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा परमेश्वर की धार्मिकता को प्राप्त कर पाए। रोमियों की तुलना याकूब के पत्री से करते हुए, वह व्यक्ति जिसने पहले को ‘खजाने के वचन’ और बाद को ‘भूसे के वचन’ के रूप में परिभाषित किया। हालाँकि, याकूब की पत्री भी परमेश्वर का वचन है जैसे रोमियों की पत्री है। अन्तर केवल इतना है की रोमियों की पत्री बहुमूल्य है क्योंकि यह बाइबल के बारे में विस्तृत विवरण देता है, जबकि याकूब की पत्री इसलिए बहुमूल्य है क्योंकि यह धर्मी जन को परमेश्वर की इच्छा से जीवित रहने के बारे में बताता है।   https://www.bjnewlife.org/ https://youtube.com/@TheNewLifeMission https://www.facebook.com/shin.john.35
Dec 8, 2022
42 min
Ch1-2. परमेश्वर की धार्मिकता जो सुसमाचार में प्रकट हुई (रोमियों १:१६-१७)
प्रेरित पौलुस मसीह के सुसमाचार से लज्जित नहीं हुआ। उसने प्रभावशाली रूप से सुसमाचार की गवाही दी। हालाँकि, कई लोगों के रोने का एक कारण यह है कि वे अपने पापों के करण यीशु में विश्वास करते हैं। यह परमेश्वर की धार्मिकता को स्वीकार करने में उनकी अज्ञानता के कारण भी है। हम परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करने और अपनी धार्मिकता को त्यागने के द्वारा बचाए जा सकते हैं।प्रेरित पौलुस सुसमाचार से लज्जित क्यों नहीं हुआ? सबसे पहले, यह इसलिए था क्योंकि इसमें परमेश्वर की धार्मिकता प्रकट हुई थी।   https://www.bjnewlife.org/ https://youtube.com/@TheNewLifeMission https://www.facebook.com/shin.john.35
Dec 8, 2022
33 min
Ch1-3. विश्वास से धर्मी जन जीवित रहेगा (रोमियों १:१७)
धर्मी कैसे जीते हैं? विश्वास से। धर्मी विश्वास से जीते हैं। वास्तव में, ‘विश्वास’ शब्द बहुत आम है, लेकिन यह बाइबल का मूल है। धर्मी केवल विश्वास से ही जीते हैं। धर्मी कैसे जीते हैं? वे परमेश्वर पर अपने विश्वास से जीते हैं। मुझे आशा है कि हम इस भाग से प्रबुद्ध हो जाएंगे क्योंकि हमारे पास देह है और पवित्र आत्मा हमारे अन्दर निवास करता हैं। हम बाइबल में छिपे वास्तविक अर्थों को नहीं जानते हुए, अपने स्वयं के विचारों से शास्त्रों की कई व्याख्या करते हैं, हालाँकि हम बाइबल को शाब्दिक रूप से समझ सकते हैं। हमारे पास एक साथ देह और आत्मा है। इसलिए, बाइबल कहती है कि हम, धर्मी, विश्वास से जीवित रहेंगे क्योंकि हमारे पास पापों की माफ़ी है।   https://www.bjnewlife.org/ https://youtube.com/@TheNewLifeMission https://www.facebook.com/shin.john.35
Dec 8, 2022
31 min
Ch1-5. वे जो सत्य को अधर्म से दबाए रखते है (रोमियों १:१८-२५)
हम देख सकते हैं कि प्रेरित पौलुस ने उसी सुसमाचार का प्रचार किया जिस सुसमाचार का हम प्रचार करते हैं। परमेश्वर का क्रोध किस पर प्रकट होता है? परमेश्वर का न्याय उन पापियों पर प्रकट होता है जो सत्य को अधार्मिकता में दबाते हैं, अर्थात् उनके लिए जो पाप करते हैं और अपने स्वयं के विचारों से सत्य को रोकते हैं।प्रेरित पौलुस स्पष्ट रूप से कहता है कि परमेश्वर का क्रोध सबसे पहले उन लोगों पर प्रगट होता है, जो सत्य को अधार्मिकता से रोकते हैं। उनका न्याय परमेश्वर करेगा। परमेश्वर का क्रोध कैसा होगा? परमेश्वर का क्रोध उनकी देह और आत्माओं को नरक में डाल देगा।   https://www.bjnewlife.org/ https://youtube.com/@TheNewLifeMission https://www.facebook.com/shin.john.35
Dec 8, 2022
48 min
Ch2-1. रोमियों अध्याय २ का परिचय
इस संसार में, लोगों के केवल दो समूह हैं जो परमेश्वर पर विश्वास करते हैं: यहूदी और मसीही। लोगों के इन दो समूहों में, पहला समूह यीशु पर विश्वास नहीं करता है जबकि दूसरा समूह विश्वास करता है। जो यीशु पर विश्वास नहीं करते उनके विश्वास को परमेश्वर बेकार मानता है। हालाँकि, सबसे गंभीर समस्या का सामना जो मसीही लोग कर रहे है वह यह है की वे किसी तरह से यीशु पर विश्वास तो करते है लेकिन अभी तक उनके पापों की माफ़ी नहीं मिली है। प्रेरित पौलुस इस विषय के बारे में रोमियों अध्याय २ में न केवल यहूदियों और यूनानियों से लेकिन आज के मसीहीयों से भी बात करता है।   https://www.bjnewlife.org/ https://youtube.com/@TheNewLifeMission https://www.facebook.com/shin.john.35
Dec 8, 2022
52 min
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