
Priya Malik ki tamaam behtareen poetries me se ye ek or nayab moti hai. Bewafaai ka dansh jhelne waale insaan ke man par kya guzarti hai, wo stree Jo janti hai ki uska husband bewafaa hai, usko cheat kar raha hai, us stree ke manobhavo ko piroya hai is bebak si poetry me Priya ne. Ye mere Dil k behad kareeb hai or aj mai isko padhkar shayad Priya k alfàazo me apni or har aisi stree ki baat kah rahi hu, dekhe aapke Dil ko kitna chhuti hai ye......
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May 21, 2023
2 min

Tute hue dilon ko raahat deti, unko tute tukdo me bhi khubsurti dikhane wali, itna mazbut banane wali ki wo baar baar tutne se bhi na ghabraaye - aisi beautiful kavita ko Priya malik ne likha h. Mai to bas is kavita ko apna swar de rahi hu kyuki ye kavita mujhko bahot andar tak chhuti hai, mujhko jiwan jine ka ek alag hi nazariya pradan karti hai. Kyu na aap bhi ekbaar iska jaadu mahsoos kare ....
Dec 19, 2022
3 min

Vishuddh prem ki gaharaiyon ko abhivyakt karti hui ek bahut pyari or dil ko chhu lene wali kavita hai yah. Chhoti umra k kavi Vijay shree tanveer ki spasht, sidhi par sidhi dil me jaa lagne wali bhasha ka kamaal hai yah kavita.
Jul 17, 2022
2 min

Advance technology ki is robotic duniya me sachchaa pyar talaashti ek sundar si kavita. Mridul jajbato se is kavita ko Priya malik ne sanwara hai, sajaya hai, likha hai, gaya hai.
Jul 8, 2022
2 min

Hindi bhasha ki sundaratam abhivyakti hai yah kavita jo Pramod tiwariji ne likhi hai. Nadi ki anginat visheshataen hame batati hai. Nadi ka sangharsh, uska paropkari swabhaav ...Sabkuchh hai is kavita me. Manushya yadi chahe to kitna kuchh sikh sakta hai nadi se.
Jul 2, 2022
7 min

उर्दू फ़ारसी के मशहूर भारतीय शायर मिर्जा असदुल्ला बेग खां "गालिब" की बेहतरीन नज़्म है- "हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले, बहुत निकले मेरे अरमान, लेकिन फिर भी कम निकले"। गालिब साहब की ग़ज़लों की ही तरह उनके खतों और उनके किस्सों को भी उतना ही प्यार मिला है पढ़ने- सुनने वालों का। मेरी ये कोशिश रहेगी कि इस सीरीज के जरिये मैं भी अपने दर्शकों का अपने सुनने वालों का आशीर्वाद पा सकूँ।
Mar 12, 2022
4 min

उर्दू फ़ारसी के मशहूर भारतीय शायर मिर्जा असदुल्ला बेग खां "गालिब" की बेहतरीन नज़्म है- "हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है"। गालिब साहब की ग़ज़लों की ही तरह उनके खतों और उनके किस्सों को भी उतना ही प्यार मिला है पढ़ने- सुनने वालों का। मेरी ये कोशिश रहेगी कि इस सीरीज के जरिये मैं भी अपने दर्शकों का अपने सुनने वालों का आशीर्वाद पा सकूँ।
Feb 27, 2022
8 min

उर्दू फ़ारसी के मशहूर भारतीय शायर मिर्जा असदुल्ला बेग खां "गालिब" की बेहतरीन नज़्म है- ये न थी हमारी किस्मत की विसाले यार होता। गालिब साहब की ग़ज़लों की ही तरह उनके खतों और उनके किस्सों को भी उतना ही प्यार मिला है पढ़ने- सुनने वालों का। मेरी ये कोशिश रहेगी कि इस सीरीज के जरिये मैं भी अपने दर्शकों का अपने सुनने वालों का आशीर्वाद पा सकूँ।
Feb 15, 2022
6 min

कविवर भवानी प्रसाद मिश्र की एक छोटी सी दिल के बेहद करीबी कविता है ये जो यह दिखाती है कि सुखों की कमी में पले- बढ़े बच्चों को जब कही अनायास सुख मिलता है तो वे कैसे झिझकते है। उनको लगता ही नही है कि ये सुख उनका भी हो सकता है या फिर अतीत के कड़वे अनुभव उन्हें सुख को खुशी खुशी महसूस ही नही करने देते हैं। ऐसे में एक पिता के दिल के जज्बात व्यक्त किये गए हैं जो अपने बच्चों को सुख देना चाहता है पर वो बच्चे इतना डरते है सुख को देखकर कि वह उन्हें चाहकर भी सुख को महसूस करने को बढ़ावा नही दे पा रहा है।
Nov 10, 2021
4 min

दिवाली का उत्सव हमारे तन, मन, प्राण में तथा समस्त धरती पर छा जाने वाला एक अद्भुत आनंदोत्सव है। आज की रात दीयों और लाइट की जगमगाहट धरती से अमावस्या की कालिमा को मिटा देती है। लेकिन जो निचले तबके के लाचार लोग उस रात भी अंधकार में डूबे होते हैं, हमे खुशी का एक दीया उनके घर भी जलाने का प्रण लेना चाहिए। रोते हुओं को हंसाना चाहिए। तभी इस महापर्व की सार्थकता है। आज की कविता में गोपालदास नीरज का ऐसा ही कहना है.. "दीये से मिटेगा न मन का अंधेरा, धरा को उठाओ गगन को झुकाओ।"
Nov 5, 2021
5 min
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