Gaagar Me Saagar
Gaagar Me Saagar
Bandana Modi
Hindi kavita: Diye Se Mitega n Man Ka Andhera
5 minutes Posted Nov 5, 2021 at 5:23 am.
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दिवाली का उत्सव हमारे तन, मन, प्राण में तथा समस्त धरती पर छा जाने वाला एक अद्भुत आनंदोत्सव है। आज की रात दीयों और लाइट की जगमगाहट धरती से अमावस्या की कालिमा को मिटा देती है। लेकिन जो निचले तबके के लाचार लोग उस रात भी अंधकार में डूबे होते हैं, हमे खुशी का एक दीया उनके घर भी जलाने का प्रण लेना चाहिए। रोते हुओं को हंसाना चाहिए। तभी इस महापर्व की सार्थकता है। आज की कविता में गोपालदास नीरज का ऐसा ही कहना है.. "दीये से मिटेगा न मन का अंधेरा, धरा को उठाओ गगन को झुकाओ।"