Show notes
गुजरती हुई आयु का
बोझ ना रखें सीने,
अनुभव गर साथ ना हों
तो क्या मजा है जीने में!
आयु ही तो सिखलाती
चलना मुश्किल राहों में,
जितनी भी बची है जिन्दगी
क्यों ना भर लें अपनी बाहों में!
रचना सोनी (स्वरचित मौलिक)
सुनिए नए ज़माने की नयी कवितायें
कलम से एक व्हात्सप्प ग्रुप का संयोजन है जिसमें कई नामी गिरामी कवि और लेखक हैं, यह पॉडकास्ट उनके लेखन की प्रक्रिया और उनकी रचनाओं को आम जनों तक लाने का तुच्छ सा प्रयास है। आइये सुनते
हैं| अपनी प्रतिक्रियाओं से नवाजें। धन्यवाद।।
और कवितायें पढ़ने के लिए हमारे फ़ेसबुक पेज पर जाएँ....
https://www.facebook.com/rachnaayeaapkikalamse/
बोझ ना रखें सीने,
अनुभव गर साथ ना हों
तो क्या मजा है जीने में!
आयु ही तो सिखलाती
चलना मुश्किल राहों में,
जितनी भी बची है जिन्दगी
क्यों ना भर लें अपनी बाहों में!
रचना सोनी (स्वरचित मौलिक)
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