कविताएं - कुछ तजुर्बे, कुछ किस्से; कुछ आपके, कुछ मेरे हिस्से।
कविताएं - कुछ तजुर्बे, कुछ किस्से; कुछ आपके, कुछ मेरे हिस्से।
Kanishka Singh
कविता - इमारत
3 minutes Posted Aug 21, 2020 at 8:17 pm.
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ख़ुद की तुलना कभी दूसरों से ना करो। किसी और के जैसा बनना जो चाहोगे, तो खुद को कहीं दूर भूल आओगे और अंत में बचेगा सिर्फ़ और सिर्फ़ खुद को खो देने का रंज।