कविताएं - कुछ तजुर्बे, कुछ किस्से; कुछ आपके, कुछ मेरे हिस्से।
Kanishka Singh
Add to My Podcasts
Episodes
About
Reviews
Promote
कविता - "अपेक्षा या आशा? "
3 minutes
Posted Jul 4, 2020 at 8:39 pm.
0:00
3:11
Add to My Queue
Download
MP3
Share
episode
Share at current time
Show notes
अपेक्षाओं की कोई सीमा नहीं होती और ना ही वह सही मायने में कभी पूरी की जा सकती हैं, वह हमें परिणाम मात्र तक संकुचित कर देती हैं। परन्तु आशा, हमेशा लगे रहने के लिए उत्साहित करती है।
Previous
कविता - "आज"
Next
कविता - "झरोखा"
← See all 6 episodes of कविताएं - कुछ तजुर्बे, कुछ किस्से; कुछ आपके, कुछ मेरे हिस्से।