Show notes
नमस्कार दोस्तों मैं वंदना, एक सवाल जो हम अक्सर अपने आप से पूछते हैंमेरा मूल्य क्या है ? किसे जरूरत है मेरी मैं तो कुछ भी नहीं।कहानियों की नगर से एक कहानी आपके लिए ले करके आई हूंचलिए सुनते हैं।एक शहर में बहुत ही ज्ञानी प्रतापी साधु महाराज आये हुए थे, बहुत से दीन दुखी, परेशान लोग उनके पास उनकी कृपा दृष्टि पाने के लिएआने लगे. ऐसा ही एक निराश व्यक्ति 'प्रभुगुण' उनके पास आया और साधु महाराज से बोला ‘ महाराज में बहुत ही निराश हूँ, मेरे ऊपर कर्जा भी है, मैं बहुत ही परेशान हूँ। मुझ पर कुछ उपकार करें’.साधु महाराज ने उसको एक चमकीला नीले रंग का पत्थर दिया, और कहा ‘कि यह कीमती पत्थर है, जाओ जितनी कीमत लगवा सको लगवा लो।सुनते ' की कहानी।

