Show notes
दोस्तों हम अपने शरीर का बहुत ध्यान रखते हैं अच्छा खाना खाते हैं खूब पानी पीते हैं। और उसे स्वस्थ रखते हैं ।क्या कभी हम सड़ा गला जला हुआ खाना खाते ।नहीं ना क्योंकि इससे हमारा शरीर खराब होता है हम अपने शरीर का इतना ध्यान रखते हैं तो अपने मन का ध्यान क्यों नहीं रखते।हमारे मन को भी तो भोजन की आवश्यकता होती है हमारा मन का भोजन होता है हमारे विचार और हमारी भावनाएं । दोस्तों बहुत सी ऐसी भावनाएं हैं जो हमारे मन को बीमार कर देती हैं उनमें से एक भावना के बारे में मैं आज बात करूंगी जो है ईर्ष्या , जलन। ईर्ष्या आपके मन पर अनावश्यक बोझ डालती है, हमेशा मन में एक बात गाँठ बांध लो यदि ‘तुम किसी से प्रेम नहीं कर सकते, प्यार नहीं बाँट सकते तो नफरत या ईर्ष्या भी मत करना। यही वो सबसे बड़ा कारण है जिससे आपका मन हमेशा खुश, स्वेच्छ और हल्का होगा। ईर्ष्या करने से जलन से, इस तरह की बुरी भावनाएं रखने से हम दूसरे का भला ही करते हैं क्योंकि उसे तो कोई फर्क नहीं पड़ता वह तो और मजबूत हो जाता है पर निर्बल कौन होता है हम, इसका हमारे शरीर पर भी बहुत असर होता है, तो क्यों ना निर्बलता को छोड़कर ऐसी भावनाएं छोड़कर क्यों न अच्छी भावनाओं के द्वारा बलवान और खूबसूरत बने। तो आज से ही शुरु करते है।मैं जानती हूं आप बहुत बलवान मजबूत और खूबसूरत हैं।सुनने के लिए आपका धन्यवाद आती रहूंगी मैं आपकीवंदना।

