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बुंदेलखंड क्षेत्र में दीवाली पर होने वाला मोयना नृत्य । इसके बारे में जाना तो मानो कुछ न जाना
2 minutes Posted Nov 16, 2020 at 4:05 pm.
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दीवाली पर जहां पटाखों की आवाज से आसमान गूंजता है ... पकवानो की मिठास स्वाद को दोगुना कर देती है...तो बुंदेलखंड की यह परम्परा है जो दिल खुश कर देती है ।
ढोलक की थाप,नागड़ियों की ताल पर जब कृष्ण भक्त झूमतें हैं तो उफ्फ़..भला ऐसा कौन है जो नृत्य पर मुग्ध न हो जाए ।
दीवाली हो और भला दिवारी - मोनिया नृत्य की बात न हो...कैसे सम्भव ।
पारंपरिक वेशभूषा में सजे मौन व्रत रखें कृष्ण भक्त माहौल को मानो अलग जहां में ले जाते हैं । भक्ति मेँ पगा यह नृत्य काफी प्रसिद्ध है । जहाँ इस नृत्य को स्थानीय लोग करतें हैं तो देखने के लिए न सिर्फ देश के कोने कोने से बल्कि विदेश से भी लोग यहाँ का रख करते हैं |
नज़ारा ..बुंदेलखंड अंचल का है । हज़ारों के संख्या में सजी संवरी टोलियां गांव से लेकर शहरों तक दस्तक देती हैं । झाल मंजीरा ढोलक नागड़िया पर जहां कुछ हाथ थाप देते हैं तो उन्ही केकुछ साथी लाठी थामकर बड़ी ही मंझे तरीक़े से दीवाली नृत्य करते हैं ।
बाईट - गोबिंद
सदियों से चली आ रही यह परंपरा लोगों के भाईचारा भी बनाती है । दुश्मन भी इस नृत्य में शामिल होकर दोस्त बन जाते हैं । दशहरा से शुरू हुआ यह लोकनृत्य दीवाली के बाद तक चलता है | बुंदेलखंड में इसका इंतज़ार बड़ी ही बेसब्री से होता है ।
बाइट -
झलक खजुराहों की हैं जहाँ कृष्ण भक्त मौनियों ने मतंगेश्वर महादेव के दर्शन कर अपना मौन व्रत भी खोला है | विदेशी भक्त भी लोकनृत्य में शामिल होने का मोह न छोड़ पाए |
कला,संस्कृति,भक्ति एवम आपस भाई चारे का प्रतीक यह नृत्य आज भी अपने आप में वही उत्साह और परम्परा को संजो कर रखा है । तो यदि दीवाली के वक्त बुंदलेखंड आना हो तो इस नृत्य को देखना बिल्कुल भी न भूलिएगा ।