Show notes
यह कविता किसी के आने और चले जाने के बीच की बात है।
वो चल दिये और हमें मन है की कहें कि उनके आने से क्या हुआ और अब क्या हो रहा है!
जीवन में ये सब भाव आते ही हैं। 2003 में डायरी में नोट हुई थी ये कविता - रूप देवगुण जी की रचना है जितना याद आता है।


