Show notes
1921 में 'हंस' द्वारा छपी गई बूढ़ी काकी उम्र के आख़िरी कगार पर खड़ी एक बुजुर्ग महिला की बाहरी और भीतरी दुनिया के बीच बढ़ते फ़ासले की तस्वीर बुनती है।
1921 में 'हंस' द्वारा छपी गई बूढ़ी काकी उम्र के आख़िरी कगार पर खड़ी एक बुजुर्ग महिला की बाहरी और भीतरी दुनिया के बीच बढ़ते फ़ासले की तस्वीर बुनती है।