Show notes
अल्लारखी कामचोर, बेअदब, फूहड़ और बदसूरत भी नही थी। ठंड के दिनों में भी पहर रात झाड़ू लेकर निकलती तो नौ बजे तक एक चित्त होकर झाड़ू लगाती। दारोगा खां साहब भी नेकनाम और दयालु थे। फिर भी पता नही क्यों जुर्माना कट जाता था। इस बार तो बीमार बच्ची के कारण दारोगा को गाली भी दी। इस बार क्या होगा, जानने के लिए सुनें कहानी - जुर्माना!!!!

