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"बैठकी" ज्ञानदत्त पाण्डेय की धीरेंद्र कुमार दुबे के साथ चर्चा का पॉडकास्ट है। यह पिछ्ली बार 'रिटायरमेण्ट @ 45' विषय पर चर्चा से प्रारम्भ हुई थी। हम दोनो को लगा कि उसी तरह से अन्य विषयों पर भी अपने अनुभव, अध्ययन और मनन के आधार पर सहज बातचीत की जा सकती है, जो सुनने वालों को भी शायद रुचिकर लगे। पिछली चर्चा पर एक महिला जी की टिप्पणी फेसबुक पर प्राप्त हुई - अब मरने की चर्चा कीजिये। शायद वे साठ और साठोत्तर व्यक्तियों से मरण पर सुनना चाहती हों, या शायद उन्होने इसे यूं ही लिख दिया हो; हमने टिप्पणी को पूरी गम्भीरता से लिया और यह "मरण-चर्चा" कर डाली। वह चर्चा पॉडकास्ट के रूप में आपके समक्ष प्रस्तुत है। इस चर्चा में धीरेंद्र ने एक पुस्तक Top Five Regrets of the Dying: A Life Transformed by the Dearly Departing की चर्चा की है। उसका अमेजन पर उपलब्धता का लिंक यह है - https://amzn.to/3xBtUz6



