
तमाम ज़िंदगी हम बहुत उम्मीदों...ख़्वाबों...ख्वाहिशों के ताने-बाने बुनते रहते हैं लेकिन रोज़-मर्रा के तानो-बानो में फंस कर ये उम्मीदें...ख़्वाब और ख़्वाहिशें कहीं पीछे छूट जाती हैं...
Dec 25, 2022
1 min

कुछ ख़्वाब यूँ ही बुन जाते हैं...साथ-साथ चलते-चलते...सफ़र बेशक कुछ दूर का ही होता है मगर ख़्वाब ताउम्र साथ चलते हैं...
Oct 5, 2022
1 min
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