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*जय गौर हरि*तन में श्रीजी मन में श्रीजी गाऊँ श्रीजी सुन्दर श्यामश्रीजी मानूं श्रीजी जानूं श्रीजी राखूं हिये बिच ठामश्रीजी सुख कर्त्ता, भव दुःखहर्त्ता, श्रीजी की भुजा एक ऊंची बामश्रीजी प्यारे नन्द दुलारे, श्रीजी को है गोपालपुर गामश्रीजी स्वामी अंतरयामी, श्रीजी बिना सब झूठो धामचालो श्रीजी चरण ब्रज में पधारो, याद करे भैया बलरामकल्याणराय दर्शन के प्यासे, सदा हिये रहे श्रीजी को नामतन में श्रीजी मन में श्रीजी गाऊँ श्रीजी सुन्दर श्याम⏰ स्वर सेवा: *किशोरी दासी (अंजुना जी)*



