Mukesh Kumar Soni
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Mukesh Kumar Soni
हिंसा
1 minutes Posted Sep 17, 2020 at 1:06 pm.
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स्टेशन के नीचे
एक कौवा
एक मरे चूहे को
नोच रहा था।
तभी ऊपर खड़ा मैं
एक कविता सोच रहा था।
ना जाने क्या था!
जिसे विस्मय से देख रहा था।
नोचता नोचता उबता
उसका मन।
सोचता सोचता मैं
पड़ गया
जाने किस उलझन?
कितना अंतर था
हम दोनों की करनी में।
लेकिन कुछ तो था,
जो गलत था।
कौवा हिंसा कर रहा था,
मैं उसे देख खड़ा था।
पर कोई था।
जो बेचारा!
बेजान पड़ा था।
MUKESH KUMAR SONI
NET Qualified in Yoga
M.A. in Yoga,M.A. in Hindi,
Post Graduate in Yoga and Naturopathy
M-9836783469,9088102430