Midah
Midah
shweta
एक गुज़ारिश!
2 minutes Posted May 31, 2020 at 11:42 am.
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हमारी ज़िंदगी के अधूरे फलसफे अक्सर हमें छोड़ जाते हैं ऐसे हालात पर, जिससे बाहर निकलना बहुत मुश्किल होता है, पर वो ज़िंदगी ही क्या जिसमें कोई अधूरी ख्वाहिश या फ़साना ना हों! पर हाँ जितनी अनमोल हमारी ये अधूरी ख़्वाहिशें और सपने होतें हैं, उससे कई गुना ज़्यादा सुकून देता है सम्पूर्णता का एहसास! ये एहसास तब और सुखद हो जाता है जब ये जीवन में एक ठोकर खाने के बाद मिलता है, वो कहते हैं ना "दिल का दर्द सिर्फ दिलजले ही समझते हैं".. इसी पर आधारित है ये "गुज़ारिश" !!!