
जब शरीर पर कोई गहरा ज़ख़्म लगता है तो बार- बार ध्यान वहीं जाता है, एक टीस जो लगातार साथ बनी रहती है।
यही मन के साथ भी है जब मन आहत होता है तो शरीर को भी तोड़ देता है। इसमें अपने गुस्से, दर्द को supress नहीं करना चाहिए बल्कि उसको channalise करने की कोशिश करनी चाहिये।
ख़ुद को ज़्यादा प्यार और देखभाल दें, बीमार मन, बीमार शरीर से भी ज़्यादा नाज़ुक हो जाता है। Supress करने से नये रोग पैदा होंगे। याद रखिये निशान भले ही छूट जाए पर धीरे-धीरे हर घाव भर ही जाता है।
-ET
#Healing #SelfCare #DontLookForValidation #LifeLessons
Nov 23, 2024
9 min

Discrimination by parents.
Suppression of natural feelings.
Hormonal act.
Mindful dealing with the teenagers..
Jul 23, 2024
4 min

Mrityu Chintan ( thought provoking)
Live before you die..
Jul 22, 2024
11 min

बातचीत से मालूम हुआ कि मिस सरगम हमेशा ही अपने लिए सारा खाना बनाती थीं और फिर बहुत सजा कर खाती थीं. छोटे छोटे बर्तनों में अपने लिए मुट्ठी मुट्ठी भर आइटम पकातीं. उस समय समझ नहीं आया पर आज समझ आता है अकेले होने का मतलब खुद को नज़रंदाज़ करना नहीं होता, आपके अन्दर पूरी दुनिया है..इसलिए मैं अकेली भी होती हूँ तो बहुत मन से पकाती हूँ और सुन्दर तरीके से सजा कर खाती हूँ.तब मिस सरगम की याद आ जाती है !
तो अच्छे से पूरी डाइट लीजिये , फल सब्जी, विटामिन, कैल्शियम मिनरल्स से भरपूर. और फिजिकल फिटनेस के लिए exercise और मेंटल हेल्थ के लिए मैडिटेशन करना न भूलें.
May 12, 2020
6 min

और कई बार ये सारी चिंताएं, नकारात्मकता व्यर्थ ही होती. अतीत को आप सुधार नहीं सकते और कई बार भविष्य में वो डर निर्मूल साबित होते हैं.इसलिए विचारों को फ़िल्टर करना सीखना होगा.
एकांत में बैठ कर सोचिये, कॉपी पेन लीजिये एक लिस्ट बना डालिए. किस भय ने आपको जकड़ रखा है, कौन सी बात आपको ताकत देती है और कौन सी कमज़ोर करती है. किसके साथ आपको अच्छा लगता है और किसके साथ आप परेशान रहते हैं, आपके जीवन का क्या उद्देश्य है, क्या आप खुद के प्रति उस उद्देश के प्रति इमानदार हैं ऐसे ही अनेकों सवाल और शंकाएं जो आपके मन में उठते रहते हैं सब लिख डालिए
बिना बायस्ड हुए उनके जवाब ढूंढिए. तब अब पायेंगे कि कितने डर तो व्यर्थ ही थे जिनका अब कोई वजूद ही नहीं फिर भी वो पुराने सामान की तरह सजे बैठे हैं तुरंत उनको निकल फेंकिये जैसे घर में पड़े हुए कबाड़ को समय समय पर ख़ाली करना ज़रूरी है ठीक वैसे ही दिमाग की सफाई भी बेहद ज़रूरी है....
Apr 29, 2020
7 min

ज़िन्दगी और मृत्यु का फासला एक क्षण का है, एक क्षण आपके पास सब कुछ और दूसरे ही क्षण शून्य, फिर क्यों सब मुठ्ठी में बांध लेने की कोशिश में हम सारा जीवन छटपटाते हैं, जीते जी मुट्ठी खोल देना ही मुक्ति है और खुशी का मार्ग भी.... ज़रूरी नहीं हमेशा जोड़ा ही जाए, जीवन से कई बार बहुत कुछ घटा देना भी रास्ते ज़्यादा सहज और आसान करता है !
तो दोस्तों आपकी खुशियों के ख़जाने की चाबी अपने खुद के पास है, खोजिये और खोलिए ख़जाना.
- इरा टाक
Apr 25, 2020
6 min

मुश्किल भी है ऐसे वक़्त में खुद को संतुलित रख पाना, परन्तु संतुलन ही असल परीक्षा तो भीषणतम वक़्त में ही होती है.
जीवन आशा की डोर थामे रखने का नाम है. हर संभव कोशिश करते हुए खुद को खुश और सकारात्मक बनाये रखना एक कला है जो निरंतर अभ्यास से सीखी जा सकती है.
अपार संभावनाएं हैं, इस ज़िन्दगी में, हम जितना चाहें हासिल कर सकते हैं. अक्सर लोग अतीत को याद करने में अपना वक़्त बिता देते हैं, कुछ भविष्य के चिंतन में लगे रहते हैं. अतीत की तरफ बार- बार मुड़ कर देखने से या भविष्य की चिंता का बोझ सर पर लादे रहने से रफ़्तार कम हो जाती है. इसलिए वर्तमान में रहना, ज़िन्दगी जीने का सबसे सरल उपाय है. जब अँधेरा गहनतम हो तब निराश होने की बजाय उस वक़्त को याद करें, जब पहले इससे भी गहन अँधेरे से निकल आप रोशनी में आये थे, पैरों में गति आ जायेगी और रोशनी की तरफ फासला कम होता नज़र आएगा.
याद रखिये
" ये भी गुज़र जायेगा ".
कैसा भी वक़्त हो गुज़र जाता है इसलिए सुख में होश न खोना और दुःख में हिम्मत ! जब सब खो जाता है तब भी अगर हिम्मत बची रहे तो वो सब वापस दिलाने की काबिलियत रखती है... ये कोरोना काल का लॉक डाउन, घर में रहते हुए ज्यादा से ज्यादा एक्टिव रहने...
Apr 23, 2020
8 min
