Show notes
होता है कभी कभी बस यूं ही तो ,
छूट रहा होता है कुछ कतरा कतरा करके.....
ज़िद होती है तब थाम लेने की वक़्त को शायद,
ख़ुद की क़ीमत पे, ख़ुद को फ़ना करके....
होता है कभी कभी बस यूं ही तो ,
छूट रहा होता है कुछ कतरा कतरा करके.....
ज़िद होती है तब थाम लेने की वक़्त को शायद,
ख़ुद की क़ीमत पे, ख़ुद को फ़ना करके....