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* सात्विकता के अधिक होने का प्रयास करो, परंतु सात्विक प्रधान में " मुझे ज्ञान हो गया " यह भ्रम हो जाता है
* गुरु बनने की ललक बड़ी खतरनाक
* सात्विकता बढ़ने पर कई सिद्धियाँ आ जाती है
* तीन इच्छाएं प्रमुख होती है -
करने की
जानने की
पाने की
* त्रिगुणतीत के लिए प्रकृति के गुण प्रभावहीन हो जाते है
* समाधि का अर्थ है जिसकी बुद्धि समता में आ जय
* समर्पण घटने पर सब बन जाता है

