
पुत्रकामेष्टि यज्ञ की दो कथाएँ हमारे महाकाव्यों में मिलती हैं, पहली कथा त्रेता युग की है, दुसरी द्वापर युग की।इन दो कथाओं को एक साथ देखेंगे तो मंशा(intention) का महत्व सहज रूप से समझ आ जाएगा।
Aug 1, 2020
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राजा भगीरथ कथा को स्थूल अर्थों में देखने पर जान पड़ता है कि जो केवल देवताओं के लिए सुलभ रहीं उस गंगाजी को भी मनुष्य अपनी कठोर तपस्या(मेहनत) और इच्छा-शक्ति से पा सकता है किंतु इस कथा में सूक्ष्म अर्थ भी छिपे हैं...
Jul 21, 2020
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क्या चारित्रिक बदलाव संभव है? बुराई के रास्ते पर दूर निकल चुका यात्री क्या मार्ग बदल सकता है! सुने इस कड़ी को।
Jul 20, 2020
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साहित्य में व्यक्तिनिष्ठ भावनाओं की प्रधानता बड़ी प्रबल होती है जिसके परिणाम स्वरूप सत्यनिष्ठ, धर्मनिष्ट(कर्तव्यनिष्ठ) पात्र, जो अपने संबंधों की बलि देकर न्याय से नाता जोड़ते हैं वे खलनायक नज़र आने लगते हैं...
Jul 19, 2020
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शक्ति के घोर घमंड में "मैं" से भरे लंकापति रावण ने ऐसा विचार किया और कैलाश सहित भोलेनाथ को उठा लिया फिर...
Jul 17, 2020
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भगवान विनायक के गजानन बनने की पूरी कथा में एक दर्शन छिपा दिखता है...
Jul 16, 2020
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देवदत्त ने बुद्ध के संघ को तोड़ दिया ये कहते हुए की बुद्ध के मार्ग में कुछ त्रुटियाँ हैं, अगर लोग देवदत्त का मार्ग चुनेंगे तो वे बोधिसत्व को तेजी से पा लेंगे। नए लड़के देवदत्त के प्रभाव में आ गए क्योंकि देवदत्त रोमांच दिखा रहा था, उसके पास बड़ा और बेहतर सपना था मगर...
Jul 15, 2020
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बाल हनुमान जिनमें अतुलित शक्ति है, अज्ञानता वश वे सम्पुर्ण सृष्टि को प्रकाश देने वाले सुर्य देव को निगलने निकल पड़ते हैं किन्तु...
Jul 14, 2020
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जंगल केवल पेड़ों का झुंड नही होता वह करोड़ों जीवों घर होता है, जहां सारे जीव सह अस्तित्व को समझते हुए एक साथ निवास करते हैं, फिर एक दिन मनुष्य अपने भोग की भूख के साथ आता है और सबकुछ केवल अपने लिए समेट लेना चाहता है...
Jul 13, 2020
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