Bait Ul Ghazal - Urdu & Hindi Poetry
Bait Ul Ghazal - Urdu & Hindi Poetry
Bait Ul Ghazal
S01E10 Chalo Ik Baar Phir Se Ajnabi Ban Jaayein - Sahir Ludhianvi
58 seconds Posted Apr 25, 2022 at 4:52 pm.
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चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएँ हम दोनों

न मैं तुम से कोई उम्मीद रखूँ दिल-नवाज़ी की
न तुम मेरी तरफ़ देखो ग़लत-अंदाज़ नज़रों से
न मेरे दिल की धड़कन लड़खड़ाए मेरी बातों से
न ज़ाहिर हो तुम्हारी कश्मकश का राज़ नज़रों से

तुम्हें भी कोई उलझन रोकती है पेश-क़दमी से
मुझे भी लोग कहते हैं कि ये जल्वे पराए हैं
मेरे हमराह भी रुस्वाइयाँ हैं मेरे माज़ी की
तुम्हारे साथ भी गुज़री हुई रातों के साए हैं

साहिर लुधियानवी

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