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सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो
किसी के वास्ते राहें कहां बदलती हैं
तुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो
यहां किसी को कोई रास्ता नहीं देता
मुझे गिरा के अगर तुम संभल सको तो चलो
कहीं नहीं कोई सूरज धुआं धुआं है फ़ज़ा
ख़ुद अपने आप से बाहर निकल सको तो चलो
यही है ज़िंदगी कुछ ख़्वाब चंद उम्मीदें
इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो--- Send in a voice message: https://anchor.fm/bait-ul-ghazal/message



