जंगल के किनारे एक छोटी सी नदी बहती थी। नदी के एक और जंगल था तो, दूसरी और एक छोटा सा गाँव था। उस गाँव में एक बहुत गरीब लेकिन बेहद ईमानदार लकड़हारा रहता था। उस लकड़हारे का नाम भोला था। भोला रोज़ सुबह नदी पार कर, जंगल में जाता वहां से लकड़ियां काटकर बाजार में बेच देता और उसी पैसे से अपने परिवार का पालन पोषण करता। एक दिन भोला नदी किनारे लकड़ियां काट रहा था। तभी, इस कुल्हाड़ी से वो लकड़ियां काट रहा था वो उसके हाथ से छूटकर नदी में जा गिरी। भोला बहुत उदास हो गया और वहीँ नदी किनारे बैठ कर रोने लगा। उसका रोना सुनकर नादी के देवता उसके सामने प्रकट हो गए। उन्होंने भोला से पूछा, "क्या हुआ वत्स, तुम क्यों रो रहे हो?" भोला ने कहा, प्रभु मैं अभी यहाँ जब लड़ियाँ काट रहा था तो मेरे हाथ से छूट कर मेरी कुल्हाड़ी नदी में जा गिरी। मैं बहुत गरीब हूँ, मेरे पास तो इतने पैसे भी नहीं है कि मै कोई नै कुल्हाड़ी खरीद लूँ। अब मेरा क्या होगा, बिना कुल्हाड़ी के मै लकड़ियां कैसे काटूंगा? मेरे परिवार का गुज़ारा कैसे होगा। और ऐसा कह कर भोला ज़ोर- ज़ोर से रोने लगा। नदी के देवता को उस पर दया आ जाती है और वो उसकी ईमानदारी का इनाम देते हैं। लेकिन उसका पडोसी भी लालच में आकार इनाम लेने की है।
Voice_Anju Sharma

