पर सच मुझको उम्मीद नही थी इस वाले अन्नानास से😥
पर सच मुझको उम्मीद नही थी इस वाले अन्नानास से😥
vikas kasana
पर सच मुझको उम्मीद नही थी इस वाले अन्नानास से
2 minutes Posted Jun 4, 2020 at 9:42 am.
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मैं भी माँ बनने वाली थी☺️ पर बहुत व्याकुल थी
कोरोना की इस महामारी के दौर में भूख और
प्यास से, कुछ मानव मुझ जैसी बड़ी सी हथनी की
भूख मिटाना चाहते थे एक छोटे से अनानास से
रोज के जाने पहचाने चेहरे थे पर कुछ ढके हुए मास्क से...मैंने वो अनानास था खाया भूख मिटाने की
आस से.. धमाका हुआ जोर से💥✍️
पर सच मुच मुझको उम्मीद नही थी इस वाले अन्नानास से😢
छोड़ा ही क्या था ए दानव रूपी मानव तूने
सब कुछ तो पल भर में छीन लिया था
तूने मेरे पास से
पर सच मुच मुझको उम्मीद नही इस वाले अन्नानास से
अभी तो उसने सपने संजोए थे की भारत माता के आंचल पर जाकर पीऊंगा मीठा दूध
फिर जंगल मे जाकर अठखेलिया करूँगा कोमल सी घास से
पर सच मुझको उम्मीद नही थी इस वाले अन्नानास से
जो हुआ सो हुआ दुआ करती हूँ ऊपर वाले से
सभी रहे अपने परिवार के आस-पास
बदकिस्मती से खाने को मत देना
वो वाला अन्नानास😢😢
विकास कसाना कुन्डा की कलम से