Show notes
मैं भी माँ बनने वाली थी☺️ पर बहुत व्याकुल थी कोरोना की इस महामारी के दौर में भूख औरप्यास से, कुछ मानव मुझ जैसी बड़ी सी हथनी की भूख मिटाना चाहते थे एक छोटे से अनानास सेरोज के जाने पहचाने चेहरे थे पर कुछ ढके हुए मास्क से...मैंने वो अनानास था खाया भूख मिटाने कीआस से.. धमाका हुआ जोर से💥✍️पर सच मुच मुझको उम्मीद नही थी इस वाले अन्नानास से😢छोड़ा ही क्या था ए दानव रूपी मानव तूनेसब कुछ तो पल भर में छीन लिया थातूने मेरे पास सेपर सच मुच मुझको उम्मीद नही इस वाले अन्नानास सेअभी तो उसने सपने संजोए थे की भारत माता के आंचल पर जाकर पीऊंगा मीठा दूधफिर जंगल मे जाकर अठखेलिया करूँगा कोमल सी घास सेपर सच मुझको उम्मीद नही थी इस वाले अन्नानास सेजो हुआ सो हुआ दुआ करती हूँ ऊपर वाले सेसभी रहे अपने परिवार के आस-पासबदकिस्मती से खाने को मत देनावो वाला अन्नानास😢😢विकास कसाना कुन्डा की कलम से

