पर सच मुझको उम्मीद नही थी इस वाले अन्नानास से😥
पर सच मुझको उम्मीद नही थी इस वाले अन्नानास से😥
vikas kasana
एम्बुलेंस दौड़ी चली आ रही थी सायरन से मानो करकस वाणी में कोरोना कोरोना चिल्ला रही थी
10 minutes Posted Jun 3, 2020 at 1:12 am.
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मई की तपती गर्मी वो सूरज का यौवन गर्म हवाओं के बीच पांचली के कोरोना अस्पताल
एक एम्बुलेंस दौड़ी चली आ रही थी
वो सायरन के आवाज में जैसे कोरोना-कोरोना चिल्ला रही थी सब डरने लगे है मुझसे जैसे वो सबको बतला रही थी
एक एम्बुलेंस तेजी से दौड़ी चली आ रही थी
उसमे था एक फूल सा बच्चा जिसकी रिपोर्ट कोरोना
पॉजिटिव आ रही थीं
पीछे-पीछे थी माँ बाप की गाड़ी उसमे से रोने की सिसकियों की आवाज आ रही थी मानो वो सच मे सायरन की उस आवाज को जैसे हरा रही थी
एक एम्बुलेंस दौड़ी चली आ रही थी
माँ का कलेजा फटा जा रहा था..बाप के चेहरे पर गहरी उदासी छाए जा रहे थीं ..वो मुँह पूछना चाहती थी साड़ी के पल्लू से अपने फूल से बच्चे का मगर बीच
में वो कोरोना की बीमारी आ रही थी
एक एम्बुलेंस दौड़ी चली जा रही थीं
वो आंखों से निकली आँसू की धारा मानो जैसे मास्क
की वर्षों की प्यास बुझा रही थी
शुक्र है मगर उनको जिले के बड़े बड़े मेडिकल कॉलीजो से ज्यादा छोटी सी गुलाबी बिल्डिंग में उम्मीद नजर आ रही थी
एक एम्बुलेंस दौड़ी चली आ रही थी
पिता के हाथ मे एक बड़ा सा बस्ता बताया उन्होंने फूल से बच्चे को इसमें रखे काजू , बादाम, पिस्ता..बताते बताते जबान लड़खड़ा रही थी
एक एम्बुलेंस मानो जैसे छाती पर चढ़ी चली आ रही थी
✍️विकास कसाना की कलम से