Show notes
दूसरा और अंतिम भाग, सुनिए... आज भी हमारी सोच दशकों पुरानी ही है। प्रेमचंद की ये कहानी साबित करती है कि भले ही वक्त बदल गया हो, फिर भी फॉर्मेट ही बदले हैं...लोगों की सोच बदली हो! ये कहना मुश्किल है।
दूसरा और अंतिम भाग, सुनिए... आज भी हमारी सोच दशकों पुरानी ही है। प्रेमचंद की ये कहानी साबित करती है कि भले ही वक्त बदल गया हो, फिर भी फॉर्मेट ही बदले हैं...लोगों की सोच बदली हो! ये कहना मुश्किल है।