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सोलापुर, महाराष्ट्र में एक कैथोलिक परिवार में जन्मी अम्रुता सोनी ने हमेशा ही भेद-भाव का सामना किया है। उनकी वजह से उनके माँ-बाप का तलाक भी हो गया। जब वे 16 वर्ष की थीं तो एक दिन उनकी माँ ने भी उन्हें घर से निकलने के लिए कह दिया। समाज तो छोड़ो उनके परिवार के सगों ने भी अम्रुता को दुत्कारा और लांछन लगाए। उन्होंने हार नहीं मानी और जैसे तैसे करके पैसे कमाना शुरू किया। अपनी पढाई पूरी की और आज वे सरकारी ट्रांसजेंडर अफसर हैं जो HIV पीड़ित बच्चों की और ट्रांसजेंडर्स की मदद करती हैं।



