Suno Kahaniyan
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Poonam
Lehrein Jahan Tootati Hain story Written By Srivalli Radhika
23 minutes Posted Feb 8, 2022 at 5:38 am.
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https://youtu.be/ARgqMBa_WPk Lehrein Jahan Tootati Hain : Srivalli Radhika (Telugu Story)
लहरें जहाँ टूटती हैं: श्रीवल्ली राधिका (तेलुगु कहानी)
“अर्चना कल ही आ रही है।” भवानी ने बेचैनी के साथ सोचा। उस दिन जागने के बाद उसका इस प्रकार सोचना यह साठवीं बार था। दो वर्ष बाद अपने अभिन्न मित्र से मिलने की बात उसके मन को अशांत कर रही थी।
‘अभिन्न मित्रता!', हाँ, अपनी मित्रता के प्रति उन दोनों की भावना वही है। कालेज में उनकी पहली भेंट, उन दोनों के लिए आज भी एक अविस्मरणीय घटना है।तीन वर्ष का कालेज जीवन, हास्टल, साथ मिलकर देखी गयीं फ़िल्में, पढ़ी हुई पुस्तकें, प्रत्येक घटना, उनकी मित्रता को मज़बूत बनाने में सहायक ही रही। कभी भी... किसी भी परिस्थिति में दोनों की प्रतिक्रियाएँ एक जैसी होती थीं। परिहास में झगड़ने के लिए भी उनके बीच कभी मतभेद नहीं होता था।
“आपके जीवन की अद्भुत घटना कौन सी है?” यदि भवानी से कोई पूछ बैठे तो शायद वह एक ही उत्तर देगी - “ठीक मेरी तरह सोचने वाली मित्र का होना।”
डिग्री एग्ज़ाम्स समाप्त होने की देरी थी कि अर्चना का विवाह हो गया। वे इंजीनियर थे। विवाह के समय अमेरिका में थे। उनकी कंपनी की ओर से उन्हें किसी ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था। स्वयं भी अमेरिका जाते हुए अर्चना ने भवानी को सावधान किया “तुम्हारे माता पिता जो भी रिश्ता ले आएँ, उसके लिए सिर न हिला देना। किसी क्लर्क या टीचर से विवाह करके अपने जीवन को नारकीय न बना लेना।”
भवानी, धक-सी हो गयी। क्यों कि उससे एक दिन पहले ही किसी ने एक रिश्ता बताया था। वे सेक्रटेरियट में अपर डिवीजन क्लर्क थे। माता पिता इस रिश्ते पर आस लगाए बैठे थे। एक पल के लिए दुविधा में पड़ कर भवानी ने कहा “मेरा क्या है?”
इस प्रकार अमेरिका की यात्रा कर अर्चना एक वर्ष बाद लौटी। उसके पति की नौकरी मद्रास में हो गई थी। सास... ससुर... बड़ा घर, अपने बारे में विस्तार से लिखते हुए उसने भवानी के नाम एक पत्र लिखा। उसके प्रत्युत्तर में भवानी ने लिखा – उसका विवाह लगभग निश्चित हो चुका था। वर का नाम प्रकाश है... विवाह एक महीने की भीतर ही हो सकता है... वह विवाह में अवश्य आये। प्रकाश की नौकरी के बारे में बिलकुल नहीं लिखा। वे एक सरकारी दफ़्तर में अपर डिवीजन क्लर्क थे। यह बात पत्र में लिखने का साहस उसमें नहीं था। अर्चना विवाहोत्सव में आयी। प्रकाश के बारे में उसने विशेष रूप से भवानी से कुछ नहीं पूछा। भवानी ने सोचा कि देख कर उसने सब कुछ समझ लिया होगा।
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