Saahitya Ki Orr
Saahitya Ki Orr
Renu Arun
सुभद्रा कुमारी चौहान की कहानी : कदंब के फूल
9 minutes Posted May 6, 2022 at 5:40 pm.
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भामा अब कुछ चिढ़ गई थी, बोली-बड़प्पन कैसे निकालोगी मां जी, क्या मारोगी?’
मां जी को और भी क्रोध आ गया और बोलीं,‘मारूंगी भी तो मुझे कौन रोक लेगा? मैं गंगा को मार सकती हूं, तो क्या तुझे मारने में कोई मेरा हाथ पकड़ लेगा?’
‘मारो, देखूं कैसे मारती हो? मुझे वह बहू न समझ लेना जो सास की मार चुपचाप सह लेती हैं.’
‘तो क्या तू भी मुझे मारेगी? बाप रे बाप! इसने तो घड़ी भर में मेरा पानी उतार दिया. मुझे मारने कहती है. आने दे गंगा को मैं कहती हूं कि भाई तेरी स्त्री की मार सह कर अब मैं घर में न रह सकूंगी; मुझे अलग झोपड़ा डाल दे; मैं वहीं पड़ी रहूंगी. जिस घर में बहू सास को मारने के लिए खड़ी हो जाय वहां रहने का धरम नहीं.’ यह कहते-कहते मां जी ज़ोर-ज़ोर से रोने लगीं.