Saahitya Ki Orr
Saahitya Ki Orr
Renu Arun
मुंशी प्रेमचंद की कहानी : अभिलाषा
16 minutes Posted Apr 13, 2022 at 2:33 pm.
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क्यों, रोने का कोई कारण है, या यों ही रोना चाहती हो?'
'क्या मेरे रोने का कारण तुम नहीं जानते ?'
'मैं तुम्हारे दिल की बात कैसे जान सकता हूँ ?'
'तुमने जानने की चेष्टा कभी की है ?'
'मुझे इसका सान-गुमान भी न था कि तुम्हारे रोने का कोई कारण हो सकता है।'
'तुमने तो बहुत कुछ पढ़ा है, क्या तुम भी ऐसी बात कह सकते हो ?'
स्वामी ने विस्मय में पड़कर कहा, 'तुम तो पहेलियाँ बुझवाती हो ?'
'क्यों, क्या तुम कभी नहीं रोते ?'
'मैं क्यों रोने लगा।'
'तुम्हें अब कोई अभिलाषा नहीं है ?'
'मेरी सबसे बड़ी अभिलाषा पूरी हो गई। अब मैं और.... Abhilasha by Munshi Premchand ❤️🙏👍🥰