Show notes
इस कहानी में प्रेमचंद जी ने अपने छात्र जीवन और उस समय की बातें कि कैसे वह बड़े-बड़े उपन्यास कार के उपन्यास के दीवाने थे। उसी दौरान उनके रिश्ते के मामू जो बिनब्याहे थे और अधेड़ हो चले थे। जब भी वह आते तो प्रेमचंद जी को पढ़ाई के उपर घुडकी देते। इस बात से चिढ़ कर उन्होंने उनके एक करतूत पर नाटक लिखे और अपने मित्रों को सुनाया। सभी ने खूब मजे लिए फिर उन्होंने उसे अपने मामू के तकिए के नीचे रख दिए, फिर क्या हुआ जानने के लिए सुनिए कहानी!!!!

