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एनएल चर्चा के इस अंक में वृक्षारोपण अभियानों की असल जमीनी हकीकत, दिल्ली में तेजी से बढ़ते स्वाइन फ्लू (H1N1) के मामले और पिटबुल नस्ल के कुत्तों के हमलों से जुड़ी चिंताओं पर विस्तार से बात हुई. इसके साथ ही संसद के मौजूदा सत्र के दौरान गृह मंत्री अमित शाह और विपक्ष के बीच हुई तीखी बहस पर भी चर्चा की गई.इसके अलावा अमित शाह की चर्चा की पेशकश पर राहुल गांधी का पलटवार, झारखंड जेपीएससी पेपर लीक मामले में पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते की गिरफ्तारी, नल्सर यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में सीजेआई को आमंत्रण पर छात्रों का विरोध, विपक्ष के वॉकआउट के बीच संसद से ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक 2026 का पारित होना, अरुणाचल प्रदेश पर चीन के दावों के बीच भारत का कड़ा रुख, असम में बाढ़ से मची तबाही और पुनर्वास के लिए 1000 करोड़ की आवश्यकता, अमेरिकी अदालत द्वारा उद्योगपति गौतम अडानी पर लगे रिश्वत और धोखाधड़ी के आरोप खारिज, कोलंबिया में 7.4 तीव्रता के भूकंप से 132 लोगों की मौत, 'वंदे मातरम' के अपमान को अपराध घोषित करने वाले विधेयक को राष्ट्रपति मुर्मू की मंजूरी, पाकिस्तान-सऊदी अरब-तुर्की रक्षा समझौते पर भारत की पैनी नजर, जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास से नकद बरामदगी मामले में जांच समिति की रिपोर्ट, महाराष्ट्र में ओला-उबर चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने का नियम, और रूसी तेल आयात को लेकर भारत पर 100% टैरिफ लगाने वाला अमेरिकी सीनेट का प्रतिबंध विधेयक आदि ख़बरें भी हफ्ते की प्रमुख सुर्खियों में शामिल रहीं.इस हफ्ते चर्चा में बतौर मेहमान संक्रामक रोगों की विशेषज्ञ और 17 वर्षों का वृहद अनुभव रखने वाली जानी-मानी चिकित्सक डॉ. तृप्ति गिलाड़ा शामिल हुईं. न्यूज़लॉन्ड्री टीम से बातचीत में सह संपादक शार्दूल कात्यायन, वरिष्ठ पत्रकार हृदेश जोशी और विकास जांगड़ा ने हिस्सा लिया. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के प्रबंध संपादक अतुल चौरसिया ने किया.चूंकि आज स्वतंत्रता दिवस है तो उसी से चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल स्वतंत्रता दिवस की यादों और उत्तराखंड के इतिहास के बारे में हृदयेश से सवाल करते हैं कि 15 अगस्त से जुड़ी बचपन की सबसे मजेदार यादें क्या हैं?इस पर हृदयेश बताते हैं कि बचपन में स्वतंत्रता दिवस पर सुबह बहुत जल्दी उठकर प्रभात फेरियों में जाना पड़ता था. वे याद करते हैं कि कैसे उनके शिक्षक नदीम सर के नेतृत्व में बच्चे पूरे हल्द्वानी शहर में घूमकर 'कौमी एकता जिंदाबाद' और स्वतंत्रता सेनानियों के नारे लगाते थे. भीषण गर्मी और पसीने के बावजूद प्रभात फेरी के बाद झंडारोहण और बूंदी के लड्डू मिलने का उत्साह अलग ही होता था.इसके आगे उत्तराखंड के ऐतिहासिक संदर्भ पर बात करते हुए हृदयेश कहते हैं कि उत्तराखंड का स्वतंत्रता संग्राम और पर्यावरण आंदोलन आपस में बहुत गहराई से जुड़े हुए हैं. 1916 में कुमाऊँ परिषद का गठन, 1920 का कुली-बेगार आंदोलन, गांधी जी का आगमन और तिलाड़ी कांड जैसी घटनाएँ राज्य के समृद्ध इतिहास को दर्शाती हैं.वे पेशावर विद्रोह के नायक वीर चंद्र सिंह गढ़वाली का विशेष उल्लेख करते हुए बताते हैं कि कैसे उन्होंने खान अब्दुल गफ्फार खान के 'खुदाई खिदमतगार' आंदोलनकारियों पर गोली चलाने के ब्रिटिश हुकूम के आदेश को साफ नकार दिया था और जेल जाना स्वीकार किया था. सुनिए पूरी चर्चा- टाइमकोड्स:00:00 - इंट्रो और ज़रूरी सूचना 4:00 - सुर्खियां 10:54 - स्वतंत्रता दिवस 22:15 - स्वाइन फ्लू का प्रकोप43:45 - सब्सक्राइबर्स के पत्र 49:20 - FCRA विधेयक01:01:40 - चमोली टनल हादसा 01:11:22 - पिटबुल के हमले01:37:00 - सलाह और सुझावनोट: चर्चा में अपने पत्र भेजने के लिए यहां क्लिक करें.चर्चा में पिछले सप्ताह देखने, पढ़ने और सुनने के लिए किसने क्या सुझाव दिए, उसके लिए यहां क्लिक करें.ट्रांसक्रिप्शन: तस्नीम फातिमा प्रोडक्शन : सौरव कुमार रंजन संपादन: सौरव कुमार रंजन Hosted on Acast. See acast.com/privacy for more information.


