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एनएल चर्चा 306: इलेक्टोरल बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट की रोक और किसान आंदोलन 2.0
1 hour 40 minutes Posted Feb 17, 2024 at 11:48 am.
इंट्रो और जरूरी सूचना05:04 - 23:52 - सुर्खियां23:53 - 1:11:40 - सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनावी बॉन्ड को असंवैधानिक करार देकर रद्द किए जाने का फैसला 1:11:41 - 1:25:18 - किसान आंदोलन, एमएसपी समेत उनकी अन्य मांगें, सरकार के साथ बैठक, पिछले आंदोलन के दौरान उन पर दर्ज एफआईआर वापस न लेना1:25:19 - 1:27:03 - सब्सक्राइबर्स के मेल1:27:04 - 1:40:16 - सलाह और सुझावपत्रकारों की राय क्या देखा, पढ़ा और सुना जाएहृदयेश जोशीएडीआर की वेबसाइटइलेक्टोरल बॉन्ड पर नितिन सेठी की रिपोर्ट सीरीजपॉल आर. ब्रास की किताब- एन इंडियन पॉलिटिकल लाइफ: चरण सिंह एंड कांग्रेस पॉलिटिक्स शार्दूल कात्यायनन्यूज़लॉन्ड्री पर जगदीप छोकर कालेखजॉन स्टीवर्ट की पॉलिटिकल कमेंट्री- द डेली शोसाहिर लुधियानवी की किताब- तल्खियां अभिनंदन सेखरीदंगल फिल्म का शीर्षक गीत जगदीप छोकरसलाह- देश के बारे में सोचेंं.अतुल चौरसियानमित अरोरा की किताब- इंडियन्स इलेक्टोरल बॉन्ड पर नितिन सेठी की रिपोर्ट सीरीजट्रांसक्रिप्शन: सत्येंद्र कुमार चौधुरी प्रोड्यूसर: आशीष आनंदएडिटिंग: प्रशांत कुमार Hosted on Acast. See acast.com/privacy for more information.
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इस हफ्ते चर्चा के प्रमुख विषय सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनावी बॉन्ड को असंवैधानिक करार देकर रद्द करना और एमएसपी की कानूनी गारंटी समेत कई मांगो को लेकर किसानों के दिल्ली कूच का ऐलान आदि रहे. चर्चा में एडीआर के सह-संस्थापक एवं पूर्व प्रोफेसर जगदीप छोकर शामिल हुए. इसके अलावा न्यूज़लॉन्ड्री टीम से अभिनंदन सेखरी, शार्दूल कात्यायन और हृदयेश जोशी ने चर्चा में हिस्सा लिया. वहीं, चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के प्रबंध संपादक अतुल चौरसिया ने किया.चर्चा के प्रमुख विषय सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ द्वारा इलेक्टोरल बॉन्ड को असंवैधानिक करार देने को लेकर अतुल सवाल करते हैं, “चुनाव सुधार का एक बहुत बड़ा मुद्दा है, जो लंबे समय से अटका है, साथ में इस इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए पिछले पांच सालों में जो नुकसान हुआ है क्या उनकी कोई जवाबदेही तय होने का रास्ता इस फैसले में है?”इसके जवाब में जगदीप छोकर कहते हैं, “इस फैसले से जो बदमाशी 2017 में शुरू की गई थी, वो खत्म हो गई है. इसमें सबसे बड़ी खराबी ये थी कि सत्तारूढ़ दल को दूसरे दलों का चंदा बंद करवाने का अच्छा तरीका मिल गया था. दूसरी खराबी ये थी कि जनता को जो सूचना मिलती है, उसको बंद करवा दिया, तो सूचना के अधिकार का भी इसमें उल्लंघन था. फिलहाल, फैसले के बाद ये दोनों खामियां हटा दी गई हैं. क्योंकि इलेक्टोरल बॉन्ड ऐसे ही चलते रहते तो देश में एक ही पार्टी का राज रह जाता. ये लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ा खतरा था. मुझे ये शांति है कि फिलहाल वो खतरा टल गया है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि हमारा लोकतंत्र बड़ा अच्छा हो गया हैसुनिए पूरी चर्चा-टाइम कोड्स00 - 05:03 - इंट्रो और जरूरी सूचना05:04 - 23:52 - सुर्खियां23:53 - 1:11:40 - सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनावी बॉन्ड को असंवैधानिक करार देकर रद्द किए जाने का फैसला 1:11:41 - 1:25:18 - किसान आंदोलन, एमएसपी समेत उनकी अन्य मांगें, सरकार के साथ बैठक, पिछले आंदोलन के दौरान उन पर दर्ज एफआईआर वापस न लेना1:25:19 - 1:27:03 - सब्सक्राइबर्स के मेल1:27:04 - 1:40:16 - सलाह और सुझावपत्रकारों की राय क्या देखा, पढ़ा और सुना जाएहृदयेश जोशीएडीआर की वेबसाइटइलेक्टोरल बॉन्ड पर नितिन सेठी की रिपोर्ट सीरीजपॉल आर. ब्रास की किताब- एन इंडियन पॉलिटिकल लाइफ: चरण सिंह एंड कांग्रेस पॉलिटिक्स शार्दूल कात्यायनन्यूज़लॉन्ड्री पर जगदीप छोकर कालेखजॉन स्टीवर्ट की पॉलिटिकल कमेंट्री- द डेली शोसाहिर लुधियानवी की किताब- तल्खियां अभिनंदन सेखरीदंगल फिल्म का शीर्षक गीत जगदीप छोकरसलाह- देश के बारे में सोचेंं.अतुल चौरसियानमित अरोरा की किताब- इंडियन्स इलेक्टोरल बॉन्ड पर नितिन सेठी की रिपोर्ट सीरीजट्रांसक्रिप्शन: सत्येंद्र कुमार चौधुरी प्रोड्यूसर: आशीष आनंदएडिटिंग: प्रशांत कुमार Hosted on Acast. See acast.com/privacy for more information.